भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने वाली नई तैयारी, आखिर क्या है C-295 का वह सिस्टम जो बदलेगा सैन्य ऑपरेशन का तरीका?

भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) अब स्वदेशी C-295 विमान के लिए हैवी ड्रॉप सिस्टम विकसित करेगा.

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Reepu Kumari

भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और अहम पहल शुरू होने जा रही है. स्वदेशी C-295 विमान के लिए विशेष हैवी ड्रॉप सिस्टम विकसित करने की जिम्मेदारी हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) को सौंपी गई है. इस तकनीक के जरिए कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में सैन्य उपकरण और जरूरी सामग्री पहुंचाना पहले से अधिक आसान और सटीक हो सकेगा.

हिमालय की ऊंची चोटियों से लेकर राजस्थान के विशाल रेगिस्तानी क्षेत्रों तक, जहां सामान्य परिवहन व्यवस्था चुनौती बन जाती है, वहां यह प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक सेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करने में मददगार साबित होगी.

आगरा में होंगे शुरुआती परीक्षण

स्वदेशी C-295 विमान के लिए तैयार किए जा रहे इस हैवी ड्रॉप सिस्टम के शुरुआती परीक्षण आगरा स्थित मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में किए जाएंगे. इसके बाद अन्य परीक्षण राजस्थान सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे. परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि सिस्टम अलग-अलग भौगोलिक और मौसमीय परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सके.


सात टन तक भार ले जाने की क्षमता

यह प्रणाली एक मजबूत लोहे के प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जिसमें अधिकतम सात टन तक का सैन्य सामान रखा जा सकेगा. प्लेटफॉर्म के साथ पैराशूट प्रणाली जुड़ी होगी, जिसकी मदद से उपकरणों और सामग्री को सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचाया जाएगा. इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रसद आपूर्ति की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी.

जीपीएस तकनीक से मिलेगी सटीकता

हैवी ड्रॉप सिस्टम में ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) सहित कई आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे. इनकी मदद से सैन्य सामग्री को निर्धारित स्थान के करीब उतारना संभव होगा. यह विशेषता उन परिस्थितियों में बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां सटीक स्थान पर आपूर्ति पहुंचाना मिशन की सफलता के लिए जरूरी होता है.

पहले भी विकसित कर चुका है कई सिस्टम

एडीआरडीई इससे पहले एएन-32 और सी-130 जे जैसे विमानों के लिए भी हैवी ड्रॉप सिस्टम विकसित कर चुका है. संस्थान द्वारा पी-7, पी-16 और पी-20 टन क्षमता वाले सिस्टम तैयार किए गए हैं. इसी अनुभव के आधार पर अब C-295 विमान के लिए नई प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे स्वदेशी रक्षा तकनीक को और मजबूती मिलेगी.

आपदा और सैन्य अभियानों में बढ़ेगी उपयोगिता

C-295 विमान की विशेषता यह है कि इसका उपयोग माल ढुलाई के साथ-साथ पैराट्रूपर्स को उतारने के लिए भी किया जा सकता है. छोटे रनवे पर उतरने की क्षमता इसे और उपयोगी बनाती है. ऐसे में हैवी ड्रॉप सिस्टम के जुड़ने से यह विमान आपदा राहत, आपातकालीन स्थितियों और सैन्य अभियानों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा. इससे जरूरत पड़ने पर कठिन इलाकों में भी तेजी से सहायता और संसाधन पहुंचाना संभव होगा.