बलिया में 11 साल के शास्वत तिवारी बने महंत, वैदिक मंत्रों के बीच संभाली मठ की गद्दी

उत्तर प्रदेश के बलिया में 11 वर्षीय शास्वत शौर्य तिवारी का वैदिक परंपराओं के अनुसार महंत के रूप में अभिषेक किया गया. नए नाम के साथ उन्होंने मठ की गद्दी संभाली और अब गुरुजनों के मार्गदर्शन में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करेंगे.

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Sagar Bhardwaj

बलिया जिले के रेवती क्षेत्र में स्थित मझौवा मठ और लक्ष्मी नारायण मंदिर को नया महंत मिल गया है. रविवार को आयोजित धार्मिक समारोह में 11 वर्षीय शास्वत शौर्य तिवारी का वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अभिषेक किया गया. अभिषेक के बाद उन्हें नया आध्यात्मिक नाम श्याम नारायण रामानुज वैष्णव दास दिया गया. इस अवसर पर संत-महात्माओं, स्थानीय श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों की बड़ी संख्या मौजूद रही. पूरे आयोजन में धार्मिक परंपराओं और वैदिक संस्कारों का विशेष रूप से पालन किया गया.

वैदिक मंत्रों के बीच हुआ अभिषेक

रविवार को आयोजित समारोह में बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया और धार्मिक विधानों के अनुसार अभिषेक संपन्न कराया गया. रामभद्राचार्य उर्फ बालक दास ने शास्वत शौर्य को गुरु दीक्षा प्रदान करते हुए उन्हें महंत पद की जिम्मेदारी सौंपी. अभिषेक से पहले उनका यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया गया, जिसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें गद्दी पर विराजमान किया गया. समारोह के दौरान मौजूद संतों ने नए महंत को आशीर्वाद दिया और मठ की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने की शुभकामनाएं दीं.


नए नाम के साथ मिली नई जिम्मेदारी

महंत पद ग्रहण करने के बाद शास्वत शौर्य तिवारी का नाम बदलकर श्याम नारायण रामानुज वैष्णव दास रखा गया. यह नामकरण वैष्णव परंपरा के अनुरूप किया गया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महंत केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभाता, बल्कि मठ की आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में कम उम्र में मिली यह जिम्मेदारी चर्चा का विषय बनी हुई है. श्रद्धालुओं ने नए महंत का स्वागत किया और उनसे आशीर्वाद भी प्राप्त किया.

गुरुजनों की देखरेख में होगी शिक्षा

हालांकि श्याम नारायण रामानुज वैष्णव दास को महंत की गद्दी सौंप दी गई है, लेकिन उनकी आयु अभी केवल 11 वर्ष है. इसी कारण वे फिलहाल अपने गुरुजनों के सान्निध्य में रहकर धार्मिक और शास्त्रीय शिक्षा प्राप्त करेंगे. उनके गुरु बालक दास ने बताया कि अभी मठ के संचालन की जिम्मेदारी संरक्षकों के पास रहेगी. शिक्षा और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे मठ की परंपराओं और दायित्वों को पूरी तरह निभाने के लिए तैयार होंगे.

महंत मकसुदनाचार्य के निधन के बाद खाली था पद

मझौवा मठ में महंत का पद पिछले वर्ष 25 जून 2025 को महंत मकसुदनाचार्य के निधन के बाद रिक्त हो गया था. तब से श्रद्धालु और मठ से जुड़े लोग नए उत्तराधिकारी की प्रतीक्षा कर रहे थे. अब श्याम नारायण रामानुज वैष्णव दास के अभिषेक के साथ यह परंपरा आगे बढ़ने की दिशा में नया अध्याय शुरू हुआ है. समारोह के दौरान कई भावुक दृश्य भी देखने को मिले. श्रद्धालुओं ने इसे मठ की आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.