योगी सरकार के आदेश का उल्लंघन कर मदरसों में हुई 45 नियुक्तियां, NHRC ने भेजा नोटिस
उत्तर प्रदेश सरकार अब मदरसों में शिक्षकों की भर्ती को पारदर्शी और केंद्रीकृत बनाने की तैयारी कर रही है. पहले यह काम मदरसा प्रबंधन समिति के हाथ में था, लेकिन अब इसे उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के जरिए करवाया जाएगा. भर्ती में यूपी टीईटी जैसी पात्रता परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होंगे.
उत्तर प्रदेश: यूपी में योगी सरकार द्वारा अनुदानित मदरसों में शिक्षकों की भर्ती पर लगाई गई रोक के बावजूद 45 से ज्यादा नियुक्तियां हो गईं. इस मामले में शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को कारण बताओ नोटिस भेजा है.
योगी सरकार के आदेश का उल्लंघन कर मदरसों में हुई 45 नियुक्तियां
मानवाधिकार कार्यकर्ता तलहा अंसारी ने NHRC को शिकायत भेजी है. इसमें कहा गया है कि अप्रैल-मई 2025 के बीच तत्कालीन रजिस्ट्रार ने 45 से अधिक लोगों को मदरसों में नियुक्त किया. यह तब हुआ जब सरकार की तरफ से साफ आदेश था कि भर्ती पर रोक रहेगी.
NHRC ने भेजा नोटिस
शिकायत के अनुसार प्रयागराज, कानपुर, अयोध्या, गाजीपुर, बाराबंकी जैसे कई जिलों में यह नियुक्तियां हुई हैं. इनमें शामिल कुछ मदरसे इस प्रकार हैं:- मदरसा अरबिया अशरफुल उलूम (प्रयागराज), आलिया मिस्बाहुल उलूम (प्रयागराज), बहरूल उलूम ओरिएंटल कालेज (गाजीपुर), मदरसा अल्जामेअतुल अरविया गौसिया (कानपुर), मदरसा दारुल उलूम (अयोध्या) और मदरसा इस्लामिया अरबिया बहरुल (बाराबंकी).
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सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय पहले से ही इन नियुक्तियों की जांच कर रहा है. विभाग के निदेशक शीलधर यादव ने कहा कि सभी शिकायतों की जांच चल रही है और कुछ मामलों में कार्रवाई भी की जा चुकी है.
सरकार की नई योजना
उत्तर प्रदेश सरकार अब मदरसों में शिक्षकों की भर्ती को पारदर्शी और केंद्रीकृत बनाने की तैयारी कर रही है. पहले यह काम मदरसा प्रबंधन समिति के हाथ में था, लेकिन अब इसे उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के जरिए करवाया जाएगा. भर्ती में यूपी टीईटी जैसी पात्रता परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होंगे.
राज्य में करीब 15 हजार मान्यता प्राप्त मदरसे चल रहे हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि इन मदरसों में भी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए.
पाठ्यक्रम को लेकर भी शिकायतें
हाल ही में NHRC में 50 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई गई हैं. इनमें मुख्य आरोप यह है कि सरकारी अनुदान पाने वाले मदरसों में अब SCERT और NCERT का पाठ्यक्रम लागू हो गया है, लेकिन कई शिक्षकों की योग्यता इन नए पाठ्यक्रमों के अनुसार नहीं है. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है.
तलहा अंसारी ने बताया कि उन्होंने सभी दस्तावेज और सबूत आयोग को सौंप दिए हैं. NHRC अब विभाग से जवाब मांग रहा है कि रोक के बावजूद नियुक्तियां कैसे हुईं और क्या कार्रवाई की जाएगी. यह मामला उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में उठाए गए कदमों पर सवाल खड़ा करता है. सरकार का दावा है कि वह पारदर्शिता लाने और गुणवत्ता बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष और कुछ कार्यकर्ता इसे नियमों की अनदेखी बता रहे हैं.