सड़क हादसों में दम तोड़ती जिंदगी, यूपी में इस साल अब तक 13000 रोड एक्सीडेंट, 7000 से अधिक मौतें
रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक हादसे दोपहर (12 बजे से 6 बजे) और शाम (6 बजे से 9 बजे) के समय हुए. दोपहर में 4,352 हादसों में 2,238 मौतें हुईं.
उत्तर प्रदेश में इस साल 1 जनवरी से 20 मई तक 13,000 से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें लगभग 7,700 लोगों की जान गई. एक नई राज्य-स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर और शाम का समय सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे खतरनाक रहा.
2024 में 46,052 मौतें
उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा और जागरूकता सेल द्वारा तैयार समय-आधारित विश्लेषण में iRAD (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस), eDAR (ई-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिकॉर्ड) और राज्य के सड़क सुरक्षा डैशबोर्ड के आंकड़ों का उपयोग किया गया. वर्ष 2024 में राज्य में 46,052 सड़क हादसे हुए, जिनमें 24,118 लोगों की मृत्यु हुई और 34,665 लोग घायल हुए. तुलनात्मक रूप से, 2023 में 44,534 हादसों में 23,652 मौतें और 31,098 लोग घायल हुए थे.
दोपहर और शाम सबसे घातक
रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक हादसे दोपहर (12 बजे से 6 बजे) और शाम (6 बजे से 9 बजे) के समय हुए. दोपहर में 4,352 हादसों में 2,238 मौतें हुईं. इसकी वजह "भीषण गर्मी, चालक की थकान, तेज रफ्तार और सड़कों पर वाहनों का बढ़ता दबाव" बताई गई. शाम के समय 3,254 हादसों में 1,945 मौतें हुईं, जिनका कारण "काम के बाद ट्रैफिक जाम और सूर्यास्त के बाद कम दृश्यता" रहा.
तेज रफ्तार और चालक की थकान की वजह से ज्यादा मौतें
सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक 2,629 हादसों में 1,447 मौतें हुईं, जो स्कूल और कार्यालय समय के ट्रैफिक से प्रभावित थीं. देर रात 9 बजे से 3 बजे तक 2,585 हादसों में 1,699 मौतें दर्ज की गईं. इस समय हादसों की संख्या कम थी, लेकिन तेज रफ्तार और चालक की थकान के कारण मृत्यु दर अधिक रही. सुबह 3 बजे से 6 बजे तक सबसे कम 506 हादसे हुए, लेकिन 392 मौतों के साथ मृत्यु दर 77 प्रतिशत रही. "नींद की कमी और लंबी दूरी के थके हुए चालक" इन हादसों के प्रमुख कारण थे.
सड़क सुरक्षा के लिए सुझाव
रिपोर्ट में उच्च जोखिम वाले समय में प्रवर्तन अभियान, पुलिस और गति-जांच उपकरणों की तैनाती, और सीसीटीवी निगरानी को बढ़ाने की सिफारिश की गई है. जीपीएस-ट्रैकिंग के साथ एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत करने और स्कूल-कार्यालय समय में बदलाव की सलाह दी गई है. देर रात यात्रा के लिए विश्राम क्षेत्र, नेविगेशन सहायता और हेल्पलाइन की सिफारिश की गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसों में मृत्यु दर को 50 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा है.