54 लाख के इनामी 12 खूंखार नक्सलियों ने किया सरेंडर, जवानों को सौंपे खतरनाक हथियार; सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी 12 माओवादी साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े हुए थे. इन पर कुल मिलाकर 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है. गुरुवार को यहां 12 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार की 'पूना मारगेम' नीति और लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया. सरेंडर के दौरान उन्होंने अपने हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंप दिए.
12 नक्सलियों ने किया सरेंडर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी 12 माओवादी साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े हुए थे. इन पर कुल मिलाकर 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था. नक्सलियों ने अपने पास मौजूद AK-47, SLR राइफल और बड़ी मात्रा में कारतूस भी जमा कराए. यह सुरक्षाबलों के लिए एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को कमजोर करने में मदद मिलेगी.
पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा?
अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान लगातार सफल हो रहा है. 1 जनवरी 2024 से अब तक जिले में 888 माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में वापस आ चुके हैं. इसी अवधि में 1163 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अलग-अलग मुठभेड़ों में 231 माओवादी मारे गए हैं. राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति, जो शांति, संवाद और विकास पर आधारित है, उसके सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई दे रहे हैं.
50000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता
सरेंडर करने वाले 12 माओवादियों में 8 महिला कैडर और 4 पुरुष शामिल हैं. सरकार की पुनर्वास योजना के तहत प्रत्येक सरेंडर करने वाले कैडर को 50,000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता दी गई है, ताकि वे नया जीवन शुरू कर सके. इसके अलावा उन्हें आगे भी रोजगार, प्रशिक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था की जा रही है.
'समाज की मुख्यधारा में लौट आए'
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने अन्य माओवादियों से भी अपील की है कि वे भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को छोड़कर निडर होकर समाज की मुख्यधारा में लौट आए. उन्होंने कहा कि 'पूना मारगेम' नीति माओवादियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर भविष्य देने के लिए बनाई गई है. शासन और प्रशासन उनके पुनर्वास के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने को तैयार है.
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