कौन हैं विनोद जाखड़? जिन्हें राहुल गांधी ने सौंपी NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान; संघर्ष से शिखर तक जानें पूरी कहानी
विनोद जाखड़ को NSUI का नेशनल प्रेसिडेंट बनाया गया है. वे पहले राजस्थान स्टेट प्रेसिडेंट रह चुके हैं. उनके अपॉइंटमेंट को युवाओं और सोशल बैलेंस को बढ़ावा देने की स्ट्रेटेजी के तौर पर देखा जा रहा है.
जयपुर: ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने राजस्थान की छात्र राजनीति के जाने-माने चेहरे विनोद जाखड़ को NSUI का नया नेशनल प्रेसिडेंट बनाया है. यह न सिर्फ विनोद जाखड़ के लिए बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व की बात है, क्योंकि NSUI के 55 साल के इतिहास में यह पहली बार है कि राजस्थान के किसी लीडर को कमान सौंपी गई है. विनोद जाखड़ अभी राजस्थान NSUI के स्टेट प्रेसिडेंट के तौर पर काम कर रहे थे.
विनोद जाखड़ की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. जयपुर के पास एक साधारण परिवार में जन्मे विनोद के पिता पेशे से राजमिस्त्री यानी प्लास्टर करने वाले हैं. जब विनोद 7 साल के थे, तो उनका परिवार काम की तलाश में जयपुर आ गया. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई उसी स्कूल में की जहां उनके पिता काम करते थे.
कैसे हुई राजनीति में एंट्री?
बाद में राजस्थान यूनिवर्सिटी से हायर एजुकेशन लेते हुए. वे स्टूडेंट पॉलिटिक्स में एक्टिव हो गए. विनोद जाखड़ SC कैटेगरी से हैं और राजस्थान के किसी कॉलेज के पहले दलित प्रेसिडेंट रहे. विनोद जाखड़ की असली पहचान 2018 के राजस्थान यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन चुनाव में बनी. उस समय NSUI ने उन्हें टिकट नहीं दिया.
हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा. उन्होंने न सिर्फ चुनाव जीता बल्कि पूरे राज्य में स्टूडेंट पॉलिटिक्स में अपनी साख भी बनाई. अपनी जीत के बाद, वे फिर से कांग्रेस और NSUI में शामिल हो गए.
कब बने राजस्थान NSUI के स्टेट प्रेसिडेंट?
विनोद जाखड़ को जनवरी 2024 में राजस्थान NSUI का स्टेट प्रेसिडेंट बनाया गया था. उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी में RSS के प्रोग्राम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से लेकर स्टूडेंट यूनियन चुनाव की बहाली तक कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया.
स्टूडेंट के हितों की लड़ाई में वे कई बार जेल गए, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा. उन्हें अब नेशनल लेवल पर यह अहम जिम्मेदारी इसलिए सौंपी गई है क्योंकि वे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के यूथ विज़न में फिट बैठते हैं.
राजस्थान की पॉलिटिक्स पर क्या असर पड़ेगा?
विनोद जाखड़ की नियुक्ति के कई पॉलिटिकल मतलब हैं. एक दलित युवा को नेशनल प्रेसिडेंट बनाकर कांग्रेस ने राजस्थान और दूसरे राज्यों में दलित वोट बैंक को लुभाने की कोशिश की है. पहली बार राजस्थान से किसी का इस पद पर पहुंचना राज्य के दूसरे युवा स्टूडेंट लीडर्स के लिए दिल्ली के दरवाजे खोलने जैसा है.