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बीकानेर में रहस्यमयी चूहों का मंदिर, यहां होती है 25000 चूहों की पूजा

भारत की पहचान उसके प्राचीन और भव्य मंदिरों से है. देश के हर कोने में ऐसे मंदिर हैं जहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. इनमें से कुछ मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यों के लिए खास मशहूर हैं.

Shilpa Shrivastava
बीकानेर में रहस्यमयी चूहों का मंदिर, यहां होती है 25000 चूहों की पूजा
Courtesy: AI Generated

बीकानेर: भारत की पहचान उसके प्राचीन और भव्य मंदिरों से है. देश के हर कोने में ऐसे मंदिर हैं जहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. इनमें से कुछ मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यों के लिए खास मशहूर हैं. आज हम बात करते हैं राजस्थान के बीकानेर में स्थित करणी माता मंदिर की, जिसे दुनिया चूहों के मंदिर के नाम से जानती है.  

करणी माता मंदिर की खासियत:

यह मंदिर देवी करणी माता को समर्पित है. लोग उन्हें देवी दुर्गा का अवतार मानते हैं. मंदिर के गर्भगृह में माता की प्रतिमा विराजमान है और उनके दोनों ओर उनकी बहनों की मूर्तियां भी हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी खास बात यहां रहने वाले हजारों चूहे हैं. कहा जाता है कि यहां करीब 25 हजार चूहे रहते हैं. स्थानीय भाषा में इन्हें ‘काबा’ कहा जाता है. ये चूहे पूरे मंदिर परिसर में आजादी से घूमते हैं. श्रद्धालु इन्हें दूध, मिठाई और प्रसाद बड़े प्रेम से खिलाते हैं.

सफेद चूहों का विशेष महत्व:

मंदिर में सफेद चूहों को सबसे पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि ये करणी माता और उनके परिवार के अवतार हैं. अगर किसी भक्त को सफेद चूहा दिख जाए तो इसे बहुत सौभाग्य की बात समझा जाता है. यहां गलती से भी किसी चूहे को मारना बहुत बड़ा पाप माना जाता है. अगर ऐसा हो जाए तो प्रायश्चित के लिए सोने का चूहा चढ़ाना पड़ता है.

करणी माता कौन थीं?

करणी माता 14वीं शताब्दी की एक संत थीं. वे चारण जाति से थीं और तपस्वी जीवन जीती थीं. स्थानीय लोग उन्हें देवी दुर्गा का रूप मानते हैं. उन्होंने बीकानेर और जोधपुर के किलों की नींव रखवाई थी. आज भी लोग उन्हें ‘मां’ कहकर पूजते हैं. कहा जाता है कि करणी माता के सौतेले पुत्र लक्ष्मण की डूबने से मौत हो गई थी. मां ने यमराज से प्रार्थना की कि उनके बेटे को वापस जीवित कर दें. पहले यमराज ने मना कर दिया, लेकिन बाद में माता के आग्रह पर उन्होंने लक्ष्मण समेत उनके सभी वंशजों को चूहों के रूप में जन्म देने का वरदान दे दिया. यही वजह है कि इस मंदिर में चूहों का इतना सम्मान है.

मंदिर की बनावट और मेला:

मंदिर का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने 20वीं सदी की शुरुआत में करवाया था. पूरी इमारत संगमरमर की है और इसमें मुगल शैली की झलक मिलती है. प्रवेश द्वार पर चांदी के दरवाजे लगे हैं, जिन पर देवी की कथाएं उकेरी गई हैं. यहां रोज सुबह मंगल आरती और भोग लगता है. साल में दो बार चैत्र और आश्विन नवरात्र के दौरान करणी माता मेला लगता है. इन मेलों में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. करणी माता मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और आस्था के कारण देश-विदेश में मशहूर है. यहां आने वाले भक्त चूहों को भी उतनी ही श्रद्धा से देखते हैं जितनी माता को.