नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2026 के नतीजों ने देश को एक नया नायक दिया है. राजस्थान के रावतभाटा कस्बे के रहने वाले अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की है. रावतभाटा से निकलकर अनुज ने जोधपुर एम्स से एमबीबीएस किया. चिकित्सा की डिग्री होने के बावजूद, उनका मन हमेशा प्रशासन के जरिए बदलाव लाने में लगा रहा. उनकी यह यात्रा छोटे शहर से शुरू होकर राष्ट्रीय फलक तक पहुंची है.
अनुज की शुरुआती शिक्षा रावतभाटा में हुई, जहां उन्होंने नागरिक अनुशासन को गहराई से समझा. जोधपुर एम्स से 2023 में एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने चिकित्सा के बजाय यूपीएससी को चुना. फिलहाल वे दानिक्स (DANICS) में प्रोबेशनरी ट्रेनिंग पर हैं. उनकी यह सफलता साबित करती है कि छोटे शहरों के युवा भी अपनी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर सकते हैं.
मॉक इंटरव्यू में उनकी वैचारिक गहराई साफ दिखी. एश्योर आईएएस के साथ उन्होंने नीतिगत मुद्दों और गवर्नेंस की चुनौतियों पर सहज चर्चा की. पैनल ने जब परमाणु ऊर्जा और फ्रीडम ऑफ स्पीच जैसे गंभीर विषय उठाए, तो उन्होंने पूरी तैयारी के साथ सटीक जवाब दिए. उनकी यह बौद्धिक क्षमता, स्पष्ट विचार और शांत व्यवहार ही उन्हें साक्षात्कार में दूसरों से अलग और काफी श्रेष्ठ बनाता है.
अनुज ने छोटे शहरों में 'सिविक सेंस' की कमी पर चिंता जताई. रावतभाटा की तुलना अन्य जिलों से करते हुए उन्होंने सफाई और नागरिक अनुशासन की जरूरत बताई. उनका मानना है कि प्रशासकों को व्यवहार परिवर्तन के लिए जागरूकता और जरूरत पड़ने पर दंड का उपयोग करना चाहिए. स्वास्थ्य आंकड़ों के जरिए लोगों को समझाना और जागरूक करना बदलाव लाने का एक बहुत ही प्रभावी तरीका हो सकता है.
साक्षात्कार के दौरान अपनी ईमानदारी से उन्होंने सबका दिल जीत लिया. जवाब न पता होने पर उन्होंने विनम्रता से अपनी अज्ञानता स्वीकार की. अनुज ने 'दानिक्स सेवा' को इसलिए प्राथमिकता दी क्योंकि वे सीधे जनता से जुड़ना चाहते थे. फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन में रहकर आम लोगों की समस्याओं को करीब से देखना और उन्हें प्रशासनिक स्तर पर हल करना ही उनका मुख्य लक्ष्य रहा है.
पर्यावरण के मुद्दे पर उन्होंने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण को उत्तर भारत के लिए अनिवार्य बताया. सामाजिक स्वास्थ्य के लिए वे एचआईवी जांच में गोपनीयता और जागरूकता को अनिवार्य टेस्टिंग से बेहतर मानते हैं. अपने शहर के परमाणु ऊर्जा संयंत्र को वे भविष्य की स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा का आधार मानते हैं. उनकी यह संतुलित सोच एक कुशल और दूरदर्शी प्रशासक की पहचान है.