पानी-पतासे खाते ही मची चीख-पुकार, 115 बच्चे एक साथ बीमार; उल्टी-दस्त से मचा हड़कंप
राजस्थान के कोटा जिले के पोलाई खुर्द गांव में पानी-पतासे खाने के बाद 115 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई. बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी, जिसके बाद गांव में हड़कंप मच गया.
कोटा: राजस्थान के कोटा जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पानी-पतासे खाने के बाद 115 बच्चों की तबीयत अचानक खराब हो गई. बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी, जिससे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया गया. घटना कोटा जिले के पोलाई खुर्द गांव की है. प्रभावित बच्चों में से 12 को सिमलिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी बच्चों का इलाज गांव में बनाए गए विशेष मेडिकल कैंप में किया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि अधिकांश बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन सभी पर लगातार नजर रखी जा रही है.
बच्चों की तबीयत बिगड़ते ही हरकत में आया प्रशासन
घटना की जानकारी मिलते ही उपखंड अधिकारी दीपक महावर और ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश समर गांव पहुंचे. उनकी निगरानी में राहत और उपचार की व्यवस्था की गई. दो मेडिकल टीमों को मौके पर भेजा गया, जबकि 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से गंभीर बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया ताकि समय रहते इलाज मिल सके.
गांव में मेडिकल कैंप, घर-घर जाकर हो रही जांच
बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पोलाई खुर्द गांव में विशेष मेडिकल कैंप स्थापित किया. एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की टीम घर-घर जाकर सर्वे कर रही है. जिन लोगों में उल्टी, दस्त या पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
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खाद्य सामग्री और पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पानी-पतासे बेचने वाला विक्रेता पास के शोली गांव का रहने वाला है. इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पानी-पतासे बनाने में इस्तेमाल की गई खाद्य सामग्री, चटनी और पानी के नमूने एकत्र किए. विक्रेता जिस जल स्रोत का उपयोग कर रहा था, वहां से भी पानी के सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं.
मंगलवार रात से आने लगे थे मरीज
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश समर के अनुसार, मंगलवार रात से बच्चों को संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के लक्षणों के साथ अस्पताल लाया जाने लगा था. डॉक्टरों ने समय पर उपचार शुरू किया, जिससे अधिकांश बच्चों की स्थिति में सुधार हुआ. हालांकि बीमारी की असली वजह की पुष्टि अभी नहीं हुई है.
लैब रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बीमारी की वास्तविक वजह का पता प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा. रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि बच्चों के बीमार होने की वजह क्या थी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.