3 बार मिली नाकामी, फिर टॉपरों की कॉपी से बदली किस्मत; किसान की बेटी सिमरनदीप ने UPSC में हासिल की 15वीं रैंक
पंजाब के पटियाला जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली सिमरनदीप कौर ने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया 15वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त की है.
पटियाला जिले के बिरारवाल गांव की बेटी सिमरनदीप कौर इन दिनों अपनी शानदार उपलब्धि को लेकर चर्चा में हैं. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल करने वाली सिमरनदीप को हाल ही में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सम्मानित किया. इस सम्मान के दौरान परिवार की खुशी देखने लायक थी और उनके पिता की आंखें गर्व से नम हो गईं. सिमरनदीप की सफलता रातोंरात नहीं मिली. इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, लगातार मेहनत और असफलताओं से सीखने का जज्बा छिपा है. तीन बार लक्ष्य के करीब पहुंचकर भी सफलता हाथ न लगने के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा. चौथे प्रयास में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना उन्होंने छात्र जीवन में देखा था.
एक मुलाकात ने तय कर दिया भविष्य का रास्ता
सिमरनदीप जब 12वीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तब उनके स्कूल में एक PCS अधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. अधिकारी के व्यक्तित्व, सोच और समाज के लिए उनके कार्यों ने सिमरनदीप को गहराई से प्रभावित किया. उसी दिन उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें भी प्रशासनिक सेवा में जाना है और समाज के लिए काम करना है.
इसके बाद उन्होंने पटियाला के खालसा कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखा.
Also Read
तीन असफलताओं के बाद बदली रणनीति
UPSC के शुरुआती तीन प्रयासों में सिमरनदीप प्रीलिम्स परीक्षा तो पास कर गईं, लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिल सकी. बार-बार एक ही स्तर पर रुकने के बाद उन्होंने अपनी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया. इसी दौरान उन्होंने सफल अभ्यर्थियों की कॉपियां पढ़ीं और उत्तर लेखन शैली को समझा.
टॉपरों की कॉपियों से मिली सीख ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी. उन्होंने उत्तर लिखने के तरीके, प्रस्तुतीकरण और विश्लेषण क्षमता पर विशेष काम किया, जिसका परिणाम चौथे प्रयास में शानदार सफलता के रूप में सामने आया.
किसान परिवार की बेटी ने नहीं छोड़ा हौसला
सिमरनदीप के पिता कुलदीप सिंह किसान हैं और उनकी मां अमनदीप कौर गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी. आर्थिक चुनौतियों के बीच भी माता-पिता ने बेटी का मनोबल ऊंचा रखा और हर कदम पर उसका साथ दिया.
साल 2022 में संकल्प संस्थान ने भी उनकी मदद की. संस्थान की ओर से उन्हें निशुल्क मार्गदर्शन और कोचिंग उपलब्ध कराई गई, जिससे उनकी तैयारी और मजबूत हुई.
सफलता का मंत्र बना कंसिस्टेंसी और रिवीजन
सिमरनदीप ने अपनी तैयारी के दौरान किसी नियमित क्लासरूम कोचिंग पर निर्भरता नहीं रखी. उन्होंने घर पर रहकर पढ़ाई की और रोजाना 8 से 10 घंटे अध्ययन किया. उनका मानना है कि लंबे समय तक लगातार पढ़ाई करना ही सफलता की असली कुंजी है. उन्होंने कम किताबों से पढ़ाई की, छोटे नोट्स बनाए और बार-बार रिवीजन किया. हर विषय के लिए संक्षिप्त नोट्स तैयार किए और प्रीलिम्स के लिए विशेष रिवीजन सिस्टम अपनाया. उनका वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध (PSIR) था.
अब गांवों के विकास के लिए करना चाहती हैं काम
UPSC में शानदार सफलता के बाद सिमरनदीप का अगला लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहकर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करना है. किसान परिवार से होने के कारण वह गांवों की समस्याओं और जरूरतों को करीब से समझती हैं. उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवा के माध्यम से वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं.