फीस बढ़ोतरी पर लगी रोक, छात्रों को बड़ी राहत; Punjabi University का बड़ा फैसला

पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी ने 2026-27 सत्र के लिए बढ़ाई गई ट्यूशन, रजिस्ट्रेशन और हॉस्टल फीस वापस ले ली है. अब विद्यार्थियों से पिछले सत्र के अनुसार ही फीस ली जाएगी.

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Meenu Singh

पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अकादमिक सत्र 2026-27 के लिए प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी को पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया है. अब ट्यूशन या कोर्स फीस, रजिस्ट्रेशन फीस और हॉस्टल शुल्क का ढांचा पिछले अकादमिक सत्र जैसा ही रहेगा. फीस बढ़ोतरी के विरोध में विद्यार्थी कई दिनों से वाइस चांसलर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांगों और चिंताओं पर विचार के बाद प्रशासन ने यह निर्णय लिया.

विद्यार्थियों की मांग पर फैसला

वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह के मुताबिक, रविवार को यूनिवर्सिटी परिसर में अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसमें विद्यार्थियों के हितों और उनकी मांगों पर चर्चा की गई. प्रशासन ने फीस में की गई पूरी बढ़ोतरी वापस लेने का निर्णय लिया. वीसी कार्यालय के बाहर चल रहे विद्यार्थियों के धरने के बीच आया यह फैसला छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.

पुराने स्तर पर रहेगी फीस

फीस बढ़ोतरी वापस होने के बाद 2026-27 सत्र में ट्यूशन या कोर्स फीस, रजिस्ट्रेशन शुल्क और हॉस्टल फीस पिछले अकादमिक सत्र के स्तर पर ही रहेगी. यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को कम खर्च में उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना उसका पुराना उद्देश्य है. इसी नीति को ध्यान में रखते हुए बढ़ी हुई फीस को वापस लेने का फैसला किया गया है.


वित्तीय संकट के बीच छात्रों को राहत

डॉ. जगदीप सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी गंभीर आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन विद्यार्थियों के अकादमिक हितों से समझौता नहीं किया जाएगा. उनका कहना है कि आर्थिक परेशानी किसी योग्य विद्यार्थी की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए. प्रशासन ने विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से समझने के बाद फीस वापसी का निर्णय लिया है.

सस्ती शिक्षा के वादे पर जोर

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने फीस वापसी को विद्यार्थियों की चिंता दूर करने वाला कदम बताया है. साथ ही, सस्ती और सभी के लिए उपलब्ध उच्च शिक्षा के अपने उद्देश्य को दोहराया है. फीस को पुराने स्तर पर बनाए रखने से उन छात्रों को राहत मिल सकती है, जिनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका थी. प्रशासन का कहना है कि छात्र कल्याण उसकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है.