Punjab Weather: पंजाब में सुस्त पड़ा मानसून, बढ़ी गर्मी और उमस; जानें वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम

पंजाब में मानसून कमजोर पड़ने से गर्मी और उमस बढ़ गई है. बठिंडा में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. मौसम विभाग ने कई जिलों में गर्मी का यलो अलर्ट जारी किया है.

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चंडीगढ़: पंजाब में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, जिससे राज्यभर में गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर बना रहेगा. मौसम विभाग ने फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, मानसा, संगरूर और बरनाला जिलों के लिए गर्मी और उमस का यलो अलर्ट जारी किया है.

हालांकि पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, शहीद भगत सिंह नगर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर और मोहाली के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, लेकिन इन जिलों के लिए कोई विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है.

कितना है तापमान?

बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश के अधिकतम तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 2.8 डिग्री सेल्सियस अधिक पहुंच गया है. सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 41.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा.


मौसम विशेषज्ञों ने क्या बताया?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बारिश कराने वाला कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर सक्रिय है. यह सिस्टम पंजाब से काफी दूर होने के कारण राज्य तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है. इसी वजह से बादल कम बन रहे हैं और मानसून की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं. मौसम विभाग का कहना है कि 18 जुलाई तक राज्य में केवल छिटपुट हल्की बारिश की संभावना रहेगी, जबकि गर्मी और उमस का असर जारी रहेगा.

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के निदेशक के अनुसार 19 जुलाई से पंजाब में मानसून दोबारा सक्रिय होने लगेगा. 20 से 22 जुलाई के बीच राज्य के कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है. कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी.

भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है. शुक्रवार को पंजाब में बिजली की मांग 14,571 मेगावाट तक पहुंच गई. राज्य का अपना उत्पादन 5,588 मेगावाट रहा, जबकि शेष जरूरत पूरी करने के लिए 8,980 मेगावाट बिजली ग्रिड से ली गई. निर्धारित आवंटन की तुलना में राज्य ने 161 मेगावाट कम बिजली का उपयोग किया.