भगवंत मान सरकार की ग्रामीण हुनर और महिला सशक्तिकरण के लिए नई पहल, 'पहिल मार्ट' से गांव की महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
पंजाब सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और हुनर को नया मंच देने के लिए 'पहिल मार्ट' की शुरुआत की है. इस पहल के जरिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हस्तनिर्मित उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं. यह प्रयास न केवल आजीविका को मजबूती देगा, बल्कि पंजाब की परंपराओं को नई पहचान भी दिलाएगा.
Punjab news: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जो विकास और सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रहे हैं. इसी कड़ी में ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंंद ने पंजाब सिविल सचिवालय में “पहिल मार्ट” का शुभारंभ किया. यह पहल महिलाओं की प्रतिभा को निखारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
ग्रामीण महिलाओं को नया मंच
“पहिल मार्ट” महज एक बाज़ार नहीं है, बल्कि यह पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण महिलाओं के हुनर की पहचान है. यहाँ स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएँ अपनी मेहनत से बने उत्पाद जैसे—फुलकारी, पंजाबी जूतियाँ, हस्तनिर्मित सूट, शहद, अचार, स्क्वैश, तेल, मसाले, पापड़, साबुन, मुरब्बे और मोमबत्तियाँ सीधे ग्राहकों तक पहुँचा रही हैं. इससे उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी.
सरकार की प्रतिबद्धता
शुभारंभ के अवसर पर मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंंद ने कहा कि “पहिल मार्ट” ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के प्रति पंजाब सरकार की गंभीर सोच का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह मंच हजारों महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने की प्रेरणा देगा और उनके परिवारों के साथ-साथ समाज को भी नई दिशा देगा.
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कला और परंपरा को नई पहचान
इस मार्ट की एक खासियत यह भी है कि इसके जरिए पंजाब की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को आधुनिक बाज़ार से जोड़ा जाएगा. अब फुलकारी, पारंपरिक जूतियाँ और घरेलू मसाले केवल गाँवों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि शहरों में भी आसानी से उपलब्ध होंगे. इससे ग्रामीण महिलाओं को नया आत्मविश्वास मिलेगा और पंजाब की विरासत को एक बड़ा मंच मिलेगा.
सतत विकास की ओर कदम
मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और प्रबंधकीय सचिव अजीत बालाजी जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर मौजूद थे. उन्होंने कहा कि “पहिल मार्ट” केवल एक व्यावसायिक पहल नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों में आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की नई लहर पैदा करेगा. इस तरह की पहलें सतत विकास की दिशा में अहम साबित होंगी और ग्रामीण महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में मजबूत स्थान दिलाएंगी.