पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, चारों दलों ने खोले पत्ते; अब जनता के दरबार में होगी असली परीक्षा

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर आम आदमी पार्टी, बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने अपनी शुरुआती चुनावी रणनीति तेज कर दी है. आप सरकार अपने करीब साढ़े चार साल के कामकाज और विकास मॉडल को घर-घर पहुंचा रही है.

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Reepu Kumari

Punjab Election 2027: पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन सियासी हलचल ने रफ्तार पकड़ ली है. राज्य की चार प्रमुख पार्टियां अपने-अपने मुद्दों और दावों के साथ मैदान में उतरने लगी हैं. यात्राओं, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए नेताओं ने जनता तक पहुंच बनाने की शुरुआत कर दी है. हर दल अपने काम, संगठन और राजनीतिक विरासत को सामने रखकर मतदाताओं के बीच अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश में जुटा है.

आम आदमी पार्टी सरकार अपने कार्यकाल के कामकाज को चुनावी आधार बना रही है, तो BJP केंद्र और दूसरे राज्यों में अपनी सरकारों के प्रदर्शन को पंजाब के लिए विकल्प के तौर पर पेश कर रही है. शिरोमणि अकाली दल पुराने पंथक आधार और प्रकाश सिंह बादल की विरासत को आगे रख रहा है. वहीं कांग्रेस गुटबाजी से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व और एकजुटता का संदेश देने में जुटी है.

घर-घर पहुंचाने की तैयारी में आप

वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक आम आदमी पार्टी का मुख्य फोकस सरकार के करीब साढ़े चार साल के रिपोर्ट कार्ड और विकास मॉडल को लोगों तक पहुंचाना है. पार्टी ने 20 सितंबर से राज्यव्यापी घर-घर संपर्क अभियान शुरू किया है. इसके तहत 2.68 लाख से अधिक बूथ कमेटी सदस्यों के जरिए हर परिवार तक पहुंचने की योजना है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धूरी से इस अभियान की शुरुआत की.


117 सीटों पर अकेले उतरने का दावा

बीजेपी नेता सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं. प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के अनुसार पार्टी केंद्र और अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के कामकाज को जनता के सामने रख रही है. नशे और गैंगस्टरवाद के खिलाफ कार्रवाई को भी पार्टी अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल कर रही है. भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा सभी 117 सीटों तक पहुंच रही है.

बादल की विरासत पर अकाली दल का भरोसा

शिरोमणि अकाली दल अपनी पारंपरिक राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल की विरासत को प्रमुखता से सामने रख रहा है. पार्टी उनके कार्यकाल के विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ाव को अपनी पहचान बता रही है. सुखबीर सिंह बादल की रैलियों में अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया जा रहा है. पार्टी पुराने समर्थक वर्ग को फिर जोड़ने की कोशिश में है.

कांग्रेस ने दिखाया सामूहिक नेतृत्व

कांग्रेस भी चुनावी तैयारी में एकजुटता का संदेश देने पर जोर दे रही है. सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी सामूहिक नेतृत्व को सामने रख रही है. 15 सितंबर के प्रदर्शन में चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप बाजवा और सुखजिंदर रंधावा का एक मंच पर आना इसी रणनीति का हिस्सा रहा. पायलट ने चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता का संदेश दिया.