पंजाब में एनालॉग पनीर पर सरकार का बड़ा एक्शन, अब ये गलती पड़ी तो होगी कार्रवाई; जानिए नियम
पंजाब सरकार ने एनालॉग पनीर को लेकर सख्त कदम उठाते हुए इसके उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है.
पंजाब सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में दूध से इतर सामग्री से तैयार किए जाने वाले एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है. यह आदेश पंजाब के खाद्य एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त कंवलप्रीत बराड़ ने जारी किया है. अब किसी भी नाम से इस तरह के पनीर का कारोबार करने पर सख्त कार्रवाई होगी.
निर्देश जारी
सरकार ने यह कदम खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(ए) के तहत उठाया है. विभाग ने आदेश को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत डेयरी इकाइयों, पनीर कारखानों, थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानों, ठंडे भंडारों और गोदामों की जांच होगी. पनीर ढोने वाले वाहनों को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा. इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट के खरीद संबंधी अभिलेखों की भी पड़ताल की जाएगी.
जांच में 512 में से 215 नमूने फेल
विभाग के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच पूरे पंजाब से पनीर के 512 नमूने लिए गए थे. इन्हें अधिसूचित खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया. जांच के बाद 215 नमूने यानी करीब 42 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे. इनमें 156 नमूने घटिया गुणवत्ता वाले पाए गए, जबकि 59 नमूनों को असुरक्षित बताया गया. आंकड़ों ने खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग की चिंता बढ़ा दी.
Also Read
पनीर की वसा जांच में भी सामने आई गड़बड़ी
नमूनों की जांच के दौरान पनीर में मौजूद वसा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे. विभाग के मुताबिक कुछ नमूनों में बीआर मान दूध की वसा के निर्धारित मानकों से बाहर मिला. इससे ऐसे उत्पादों में वनस्पति घी और बाहरी वसा के इस्तेमाल की बात सामने आई. अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंध केवल पनीर बनाने वाली फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है. खाद्य सेवा से जुड़े कारोबार भी इसके दायरे में होंगे और वहां भी जांच की जाएगी.
होटल ढाबों में इस्तेमाल पर भी रोक
नए आदेश के बाद होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग इकाई, क्लाउड किचन और कैंटीन में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इसके भंडारण और बिक्री पर भी रोक रहेगी. यानी किसी व्यंजन में इसका इस्तेमाल करके ग्राहकों को परोसना भी नियमों के खिलाफ होगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कारोबारी इसे असली पनीर बताकर बेचता या परोसता है, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्ती
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने प्रतिबंध को लागू कराने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही है. अधिकारियों को अपने अपने जिलों में नियमित जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. जांच के दौरान केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि खरीद और भंडारण से जुड़े दस्तावेज भी देखे जाएंगे. इससे विभाग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि प्रतिबंध के बावजूद कहीं एनालॉग पनीर की आपूर्ति तो नहीं हो रही.
असली पनीर के नाम पर बेचने पर भी कार्रवाई
एनालॉग पनीर को कम लागत वाला विकल्प माना जाता है, लेकिन इसे असली पनीर बताकर ग्राहकों को बेचना गंभीर मामला बन सकता है. अधिकारियों के अनुसार ऐसा करना खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 24 के तहत अनुचित व्यापार की श्रेणी में आ सकता है और धारा 26 का उल्लंघन भी माना जा सकता है. सरकार का एक साल का प्रतिबंध इसी तरह के कारोबार पर रोक लगाने और बाजार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की कोशिश का हिस्सा है.