पंजाब में बिना नोटिस बिजली काटी तो हाई कोर्ट हुआ सख्त, 15 कनेक्शन तुरंत बहाल करने का दिया निर्देश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बिना नोटिस 15 बिजली कनेक्शन काटने को प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताते हुए तीन दिन के भीतर बिजली बहाल करने का आदेश दिया है.
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बिना नोटिस बिजली कनेक्शन काटने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रत्येक नागरिक के गरिमापूर्ण जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं. किसी भी व्यक्ति की बिजली आपूर्ति बिना कारण बताओ नोटिस दिए और बिना सुनवाई का अवसर दिए बंद करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर 15 बिजली कनेक्शन दोबारा चालू करने का आदेश दिया है.
यह मामला लुधियाना जिले के जगराओं स्थित एक व्यावसायिक परिसर से जुड़ा है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विकास बहल ने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा को मनमाने तरीके से बंद नहीं किया जा सकता. किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना और उसका पक्ष सुनना जरूरी है. ऐसा न करना कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है.
याचिकाकर्ता हाई कोर्ट में क्या बताया?
याचिकाकर्ता मोहित मल्होत्रा और अन्य ने हाई कोर्ट में बताया कि उन्होंने नवंबर 2025 में अपने व्यावसायिक परिसर की दुकानों के लिए 15 अलग-अलग वाणिज्यिक बिजली कनेक्शनों के लिए आवेदन किया था. सभी निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद बिजली निगम ने कनेक्शन मंजूर किए. सुरक्षा राशि जमा कराई गई, मीटर लगाए गए और बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई.
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याचिकाकर्ताओं के अनुसार करीब छह महीने तक सभी कनेक्शन सामान्य रूप से चलते रहे. इस दौरान वे नियमित रूप से बिजली बिलों का भुगतान भी करते रहे. बिजली निगम भी बिना किसी आपत्ति के बिल जारी करता रहा और भुगतान स्वीकार करता रहा. इसके बावजूद अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण करने के बाद बिना कोई नोटिस दिए और बिना किसी स्पष्ट कारण के सभी 15 बिजली कनेक्शन काट दिए.
हाई कोर्ट की ओर से क्या कहा गया?
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि बिजली आपूर्ति बंद करने से पहले न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया. राज्य सरकार की ओर से भी इस तथ्य का कोई खंडन नहीं किया गया. अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना.
आदेश में क्या कहा?
हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर सभी 15 बिजली कनेक्शन बहाल करने होंगे. साथ ही याचिकाकर्ताओं को नियमित रूप से बिजली बिल और अन्य वैधानिक देनदारियों का भुगतान करते रहने के लिए कहा गया. यह व्यवस्था याचिका के अंतिम निर्णय तक लागू रहेगी.