'चेतन ने सिया को धक्का देने के लिए उकसाया...' केतन हत्या मामले में पुलिस का बयान

पुणे किले हत्याकांड की जांच में जैसे-जैसे तेजी आ रही है वैसे-वैसे इसमें नए खुलासे हो रहे हैं. जांच के दौरान पता चला कि सिया का प्रेमी चेतन चौधरी उसे अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या के लिए उकसा रहा था.

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Meenu Singh

पुणे: पुणे के चर्चित लोहागढ़ किला हत्याकांड में पुलिस जांच के साथ नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि यह वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पूरी योजना पहले से बनाई गई थी. पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला सिया अग्रवाल को उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या करने के लिए लगातार उकसाया था. इस खुलासे ने मामले को और गंभीर बना दिया है.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपियों से पूछताछ लगातार जारी है. जांच में सामने आया है कि वारदात से कुछ दिन पहले चेतन ने सिया पर दबाव बनाया था और कहा था कि अगर वह केतन की हत्या नहीं कर पाती, तो वह खुद इस काम को अंजाम देगा. पुलिस का मानना है कि हत्या को ट्रैकिंग दुर्घटना का रूप देने की योजना पहले ही तैयार कर ली गई थी.

वारदात से पहले की गई थी रेकी

जांच में यह भी पता चला है कि 31 मई को सिया और चेतन लोहागढ़ किले पहुंचे थे. पुलिस के अनुसार, दोनों ने वहां घटनास्थल का निरीक्षण किया और हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया. माना जा रहा है कि ऊंची चट्टान को इसलिए चुना गया ताकि घटना को हादसा साबित किया जा सके.


पूछताछ में सामने आई नई बातें

पुलिस का कहना है कि चेतन कई बार योजना असफल होने से नाराज था. इसी दौरान उसने सिया पर लगातार दबाव बनाया. जांचकर्ताओं को यह भी जानकारी मिली है कि सिया कथित तौर पर केतन के विग पहनने से नाराज थी और शादी तोड़ना चाहती थी, लेकिन कथित तौर पर केतन ने उससे कहा था कि अब रिश्ता तोड़ने में काफी देर हो चुकी है.

परिवार ने उठाए सवाल

मृतक केतन अग्रवाल के परिवार का कहना है कि सगाई से पहले ही सिया को उनके बेटे के गंजेपन की जानकारी दे दी गई थी, जो स्वास्थ्य संबंधी कारणों से था. परिवार का कहना है कि यदि सिया को शादी स्वीकार नहीं थी तो वह रिश्ता खत्म कर सकती थी, लेकिन हत्या जैसा कदम किसी भी स्थिति में उचित नहीं था.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

मृतक के परिजनों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर त्वरित न्याय की मांग की. मुख्यमंत्री ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का आश्वासन दिया है और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है. साथ ही उन्होंने इस घटना को केवल आपराधिक नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय बताते हुए युवाओं में बढ़ती प्रतिशोध की मानसिकता पर गंभीर मंथन की आवश्यकता पर भी जोर दिया.