पांच महीने बाद पंजाब पहुंचेंगे प्रधानमंत्री मोदी, चंडीगढ़ के बाद जालंधर में चार कार्यक्रम प्रस्तावित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को चंडीगढ़ और जालंधर के दौरे पर रहेंगे. जानकारी के मुताबिक तौर पर कार्यक्रम विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से जुड़े हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पांच महीने बाद एक बार फिर पंजाब के दौरे पर आ रहे हैं. उनका पहला पड़ाव चंडीगढ़ होगा, जहां वह दोपहर करीब सवा एक बजे पहुंचेंगे. पीएम मोदी यहां विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे और जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री जालंधर रवाना होंगे, जहां उनके चार अलग-अलग कार्यक्रम प्रस्तावित हैं.
सरकारी कार्यक्रमों के अनुसार प्रधानमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
दोआबा पर भाजपा का विशेष फोकस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का लगातार दूसरी बार जालंधर पहुंचना महज संयोग नहीं है. दोआबा क्षेत्र, जिसमें जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर शामिल हैं, पंजाब की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
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राज्य की अनुसूचित जाति आबादी का बड़ा हिस्सा इसी इलाके में निवास करता है और कई विधानसभा सीटों पर यह वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में भाजपा इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है. विशेषज्ञों के अनुसार जालंधर में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए पार्टी दलित और रविदासिया समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने का संदेश देना चाहती है.
तीन प्रमुख राजनीतिक संकेत
विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री के इस दौरे से तीन प्रमुख राजनीतिक संदेश निकलकर सामने आते हैं. पहला, केंद्र सरकार विकास परियोजनाओं के जरिए यह संदेश देना चाहेगी कि राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होने के बावजूद केंद्र पंजाब के विकास में निवेश कर रहा है. दूसरा, दोआबा के दलित मतदाताओं और रविदासिया समाज के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. तीसरा, भाजपा खुद को 2027 विधानसभा चुनाव में सत्ता के गंभीर दावेदार के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है.
जालंधर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री अमृतसर (छेहर्टा) से वाराणसी तक चलने वाली नई श्री संत रविदास एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाएंगे. आधिकारिक तौर पर इसे धार्मिक और यात्री सुविधा बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है. वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संत रविदास के प्रति दोआबा क्षेत्र की आस्था और वाराणसी से प्रधानमंत्री के संसदीय संबंध को देखते हुए इस पहल का सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व भी है.