पूर्व IPS इंदरजीत सिंह सिद्धू को राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी पद्मश्री से सम्मानित, जानें इनकी लगन कैसी बनी जन आंदोलन?
88 वर्षीय पूर्व आईपीएस इंदरजीत सिंह सिद्धू को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेंगी. इनकी लगन किस तरह से देश के लिए एक आंदोलन बन गई, चलिए जानते हैं.
नई दिल्ली: देश की सेवा करने वाले कई लोग रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी चुन लेते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वर्दी उतारने के बाद भी समाज के लिए लगातार काम करते रहते हैं. ऐसे ही एक प्रेरणादायक शख्स हैं 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी श्री इंदरजीत सिंह सिद्धू, जिन्हें पूरे देश में ‘झाड़ू योद्धा’ के नाम से जाना जाता है. स्वच्छता के प्रति उनके जुनून को सम्मान देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देंगी.
इंदरजीत सिंह सिद्धू 1964 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे. उन्होंने पंजाब पुलिस में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद से 1996 में रिटायरमेंट लिया. रिटायर होने के बाद भी उन्होंने घर बैठकर आराम नहीं किया. उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर-49 में अपनी सोसाइटी के आसपास की गलियों और सड़कों की सफाई खुद शुरू कर दी.
सुबह-सुबह निकल पड़ते थे सफाई पर:
रोज सुबह 6 बजे वह झाड़ू, थैला और कभी-कभी रिक्शा लेकर निकल पड़ते हैं. कचरा इकट्ठा करते हैं और सही जगह डिस्पोज करते हैं. उन्होंने कई बार नगर निगम को शिकायत की, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने खुद यह जिम्मेदारी उठा ली. उनके जीवन का मंत्र- “सफाई में कोई शर्म नहीं है, स्वच्छता ईश्वर के समान है” बन गया.
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शुरुआत में जब वो सड़क पर झाड़ू लगाते तो लोग उन्हें पागल समझते थे. कुछ लोग हंसते, कुछ ताने मारते. लेकिन सिद्धू जी ने कभी हार नहीं मानी. लगभग 30 साल से वे बिना रुके यह काम करते आ रहे हैं. धीरे-धीरे उनका यह अकेला अभियान एक बड़ा आंदोलन बन गया. आज उनके परिवार के सदस्य और सोसाइटी के कई लोग भी उनके साथ सफाई में जुड़ चुके हैं.
आनंद महिंद्रा ने भी की थी तारीफ:
पिछले साल उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी तारीफ की. आनंद महिंद्रा ने लिखा था- “शिकायत करने के बजाय उन्होंने खुद एक्शन लिया. सेवा की कोई उम्र नहीं होती.” इंदरजीत सिंह सिद्धू साबित करते हैं कि अच्छा काम करने के लिए न तो कोई पद चाहिए और न ही कोई उम्र. उन्होंने दिखाया कि स्वच्छ भारत का सपना सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का भी है.
88 साल की उम्र में भी रोजाना सुबह उठकर झाड़ू पकड़ना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन उन्होंने इसे अपना मिशन बना लिया. उनकी यह लगन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है. आज पूरा देश उनके साहस और समर्पण को सलाम कर रहा है. पद्मश्री सम्मान पाकर वे और भी ज्यादा लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की उम्मीद रखते हैं. उनकी कहानी बताती है कि असली सेवा चुपचाप और लगातार की जाती है.