17 अगस्त का दिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में खास महत्व रखता है. इसी दिन 1909 में लंदन में क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा को फांसी दी गई थी. उनकी शहादत को याद करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने अपने एक्स खाते पर संदेश साझा करते हुए ढींगरा की देशभक्ति और बलिदान को नमन किया. मान ने कहा कि उनका साहस भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के लिए प्रेरणा का स्रोत बना.
मदन लाल ढींगरा ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी. 1909 में लंदन में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारी विलियम हट कर्जन वायली की हत्या कर दी थी. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और मुकदमे के बाद मृत्युदंड सुनाया गया. 17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दी गई. उनकी उम्र उस समय 25 साल थी.
17 ਅਗਸਤ 1909 ਦੇ ਦਿਨ ਲੰਡਨ 'ਚ ਸ਼ਹੀਦ ਹੋਏ ਸੂਰਬੀਰ ਪੰਜਾਬੀ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਮਦਨ ਲਾਲ ਢੀਂਗਰਾ ਜੀ ਦੀ ਸ਼ਹੀਦੀ ਵਰ੍ਹੇਗੰਢ 'ਤੇ, ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਦੇਸ਼ਭਗਤੀ ਨੂੰ ਦਿਲੋਂ ਸਤਿਕਾਰ। ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਸ਼ਹੀਦੀ ਰਾਹੀਂ ਭਾਰਤ ਦਾ ਅਜ਼ਾਦੀ ਸੰਘਰਸ਼ ਕੌਮਾਂਤਰੀ ਚਰਚਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਬਣਿਆ ਅਤੇ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਦੀ ਲਹਿਰ ਨੂੰ ਨਵੀਂ ਊਰਜਾ ਮਿਲੀ। pic.twitter.com/CZPDOBDCjg
— AAP Punjab (@AAPPunjab) August 17, 2026
राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संदेश में मदन लाल ढींगरा की देशभक्ति को नमन किया. उन्होंने कहा कि ढींगरा का बलिदान केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ब्रिटेन की धरती पर हुई इस घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया. उनके बलिदान ने उन भारतीयों के बीच भी नई ऊर्जा पैदा की, जो विदेशों में रहकर देश की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे.
ढींगरा का बलिदान उस दौर में हुआ जब भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ रहा था. विदेशों में मौजूद भारतीय क्रांतिकारी भी आजादी के आंदोलन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे. लंदन में हुई उनकी कार्रवाई और उसके बाद की शहादत ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की ओर दुनिया का ध्यान खींचा. उनके साहस ने क्रांतिकारी विचारों को आगे बढ़ाने वालों को प्रभावित किया.
मदन लाल ढींगरा का नाम पंजाब के उन क्रांतिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर किया. शहादत दिवस पर उन्हें याद करते हुए मुख्यमंत्री मान ने उनके योगदान को सम्मान दिया. ढींगरा की कहानी आज भी युवाओं के लिए साहस, त्याग और देश के प्रति समर्पण का उदाहरण मानी जाती है. उनकी शहादत स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है.