लुधियाना जेल में कैदी ने की आत्महत्या, रिटायर्ड मेजर की कोठी कब्जाने के आरोप में काट रहा था सजा

लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद नया मोड़ सामने आया है. पुलिस के अनुसार कैदी ने फंदा लगाकर आत्महत्या की. परिजनों का पता न चलने से पोस्टमॉर्टम फिलहाल टाल दिया गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद एक कैदी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. शुरुआत में जेल प्रशासन ने मौत का कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बताया, लेकिन बाद में पुलिस ने खुलासा किया कि कैदी ने कथित तौर पर फंदा लगाकर आत्महत्या की थी. मृतक की पहचान सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है, जो एक चर्चित प्रॉपर्टी विवाद मामले में जेल में बंद था. मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया और परिजनों की तलाश दोनों जारी हैं.

कैदी सुखविंदर सिंह की मौत के बाद शुरुआत में जेल प्रशासन ने बताया कि उसे सांस लेने में परेशानी हुई थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. हालांकि, बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि उन्हें जेल की ओर से आत्महत्या की सूचना दी गई थी. इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

पोस्टमॉर्टम पर कोर्ट ने लगाई रोक

मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखा गया. जेल प्रशासन ने पोस्टमॉर्टम की अनुमति मांगी, लेकिन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास करनबीर सिंह बत्रा ने इसे 72 घंटे के लिए स्थगित कर दिया. अदालत ने यह फैसला मृतक के परिजनों का पता लगाने के उद्देश्य से लिया है.


परिजनों की तलाश में जुटा प्रशासन

नियमों के अनुसार जेल में किसी भी कैदी की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम के दौरान परिजनों की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है. प्रशासन ने रिकॉर्ड में दर्ज पते पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी रिश्तेदार सामने नहीं आया. इसके बाद आम लोगों से भी जानकारी साझा करने की अपील की गई है.

प्रॉपर्टी विवाद मामले में था आरोपी

सुखविंदर सिंह पिछले साल मई से जेल में बंद था. उस पर लुधियाना के अशोक नगर स्थित एक कीमती कोठी से जुड़े मामले में आरोप थे. शिकायत के अनुसार कुछ लोगों ने कथित तौर पर संपत्ति पर कब्जे की कोशिश की थी. इसी मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था.

हाईकोर्ट तक पहुंचा था जमानत का मामला

जेल में रहते हुए सुखविंदर सिंह ने अपनी रिहाई के लिए कानूनी प्रयास भी किए थे. सेशन कोर्ट से राहत न मिलने पर उसने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी जमानत मंजूर नहीं हुई. फिलहाल पुलिस और जेल प्रशासन मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जबकि पोस्टमॉर्टम और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है.