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India Daily

लुधियाना में 175 करोड़ के हवाला रैकेट का भंडाफोड़, दो सीए पर केस दर्ज; शेल कंपनियों के नाम पर चल रहा था खेल

हवाला रैकेट में 175 करोड़ रुपये विदेश भेजने का मामला सामने आया है. लुधियाना में दो सीए पर केस दर्ज हुआ है. शेल कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों से बड़ा खेल हुआ.

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Edited By: Reepu Kumari
लुधियाना में 175 करोड़ के हवाला रैकेट का भंडाफोड़, दो सीए पर केस दर्ज; शेल कंपनियों के नाम पर चल रहा था खेल
Courtesy: Grok

लुधियाना: हवाला रैकेट में 175.53 करोड़ रुपये विदेश भेजने के मामले ने लुधियाना में सनसनी फैला दी है. हवाला रैकेट की जांच के बाद सराभा नगर थाना पुलिस ने दो चार्टर्ड अकाउंटेंट ऋषभ गुप्ता और लवप्रीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आरोप है कि दोनों ने बैंक और वित्तीय रिकॉर्ड की पूरी जांच किए बिना प्रमाणपत्र जारी किए. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शेल कंपनियों के जरिए बड़ी रकम विदेश भेजी गई. आयकर विभाग की जांच में मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं.

आयकर विभाग की कार्रवाई से खुला मामला

आयकर विभाग की टीम ने 18 अगस्त को लुधियाना स्थित सीए फर्म ‘ऋषभ गुप्ता एंड एसोसिएट्स’ पर दबिश दी थी. जांच के दौरान अधिकारियों को फर्म के कई केबिन करीब छह महीने से बंद मिले. जांच में कंपनी निदेशक गौरव जैन से भी पूछताछ की गई. आरोप है कि कमीशन के लालच में कागजी कंपनियां बनाकर उनके माध्यम से विदेश में रकम भेजने का काम किया जा रहा था.

शेल कंपनियों के खातों में पहुंची रकम

जांच एजेंसियों के अनुसार भारतीय कंपनियों से पहले रकम शेल कंपनियों के बैंक खातों में भेजी गई. इसके बाद इसी पैसे को कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर सेवाओं का भुगतान बताकर विदेशी खातों में भेजा गया. जांच में कर्मण्यु इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों का भी उल्लेख सामने आया है. आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल केवल कागजी लेन देन के लिए किया गया.

फर्जी दस्तावेजों से हुआ लेन देन

पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि दोनों सीए ने संबंधित वित्तीय और बैंक रिकॉर्ड का उचित सत्यापन नहीं किया. जांच में वर्ष 2023 से 2026 के बीच हुए 175.53 करोड़ रुपये के लेन देन को भी जांच के दायरे में लिया गया है.

डिजिटल हस्ताक्षर के इस्तेमाल का आरोप

मामले में डिजिटल हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग की बात भी सामने आई है. आरोप है कि ऋषभ गुप्ता के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल लवप्रीत सिंह ने बिना जरूरी सत्यापन के किया. इसके अलावा कुछ जाली प्रपत्र तैयार कर बैंकों में जमा कराने का भी आरोप लगाया गया है. अब पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर रही है.

जांच में किन बिंदुओं पर नजर

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है;

  • 175.53 करोड़ रुपये का पूरा लेन देन.
  • शेल कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल.
  • विदेश भेजी गई रकम का वास्तविक उद्देश्य.
  • फर्जी प्रमाणपत्र और दस्तावेज तैयार करने की भूमिका.
  • डिजिटल हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग की सच्चाई.
  • मामले में शामिल अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका.

आगे बढ़ सकती है जांच

पुलिस अब आयकर विभाग से मिली जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है. अधिकारियों की जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि रकम किन कंपनियों से आई, किन खातों में गई और विदेश में इसे किस उद्देश्य से भेजा गया. मामले में शेल कंपनियों की भूमिका, फर्जी दस्तावेज, बैंक लेन देन और डिजिटल हस्ताक्षर से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है. जांच आगे बढ़ने पर इस कथित हवाला नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम सामने आने की संभावना है.