सीएम मान की पत्नी ने मजीठिया सहित 3 के खिलाफ उठाया कानूनी कदम, कोर्ट ने दिया ये आदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की है. अदालत ने मजीठिया, खैरा और रंजीत सिंह पर अंतरिम रोक लगाई.

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Kanhaiya Kumar Jha

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपने खिलाफ लगाए गए कथित रिश्वत संबंधी आरोपों को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया है. उपलब्ध अदालत संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मजीठिया, कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की. आरोपों में दावा किया गया था कि उन्होंने एक दुष्कर्म मामले में आरोपी को बचाने के लिए कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये की मांग की. डॉ. कौर ने इन आरोपों को खारिज किया है.

डॉ. गुरप्रीत कौर ने आरोपों को गलत और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है. अदालत में दायर मामले में उनकी ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री के जरिए उनके खिलाफ गंभीर आरोप प्रसारित किए गए. अदालत ने शुरुआती स्तर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सामने रखी गई सामग्री फिलहाल अपुष्ट नजर आती है. हालांकि, अंतिम फैसला मामले की आगे की सुनवाई के बाद होगा.

मजीठिया और खैरा पर भी लगाए आरोप

मामले में बताया गया कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने 1 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े आरोप सार्वजनिक किए थे. इसके बाद यह सामग्री सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सामने आई. सुखपाल सिंह खैरा पर भी आरोपों को लेकर बयान देने का उल्लेख अदालत में किया गया. डॉ. कौर का कहना है कि इन बयानों से उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा.


अदालत ने अपुष्ट सामग्री पर लगाई रोक

9 सितंबर को चंडीगढ़ जिला अदालत ने मजीठिया, खैरा और रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह को डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ अपुष्ट मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से अगले आदेश तक रोक दिया. अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसकी गरिमा का हिस्सा है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ इसका संतुलन जरूरी है. मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.

हरसिमरत बादल ने अलग मंच पर उठाया मामला

इस विवाद में हरसिमरत कौर बादल की भूमिका अलग कानूनी कार्रवाई के रूप में सामने आई है. उन्होंने 8 सितंबर को राष्ट्रीय महिला आयोग का रुख किया और डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ लगाए गए 5 करोड़ रुपये से जुड़े आरोपों की जांच तथा CBI जांच की मांग की. डॉ. गुरप्रीत कौर इन आरोपों को निराधार बता चुकी हैं. इसलिए हरसिमरत को मौजूदा मानहानि मामले में आरोपी पक्षकार बताना उपलब्ध रिपोर्टों से पुष्ट नहीं होता.

अब 30 सितंबर की सुनवाई पर नजर

अदालत के अंतरिम आदेश के बाद मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 30 सितंबर की सुनवाई होगी. उस दौरान संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. फिलहाल अदालत ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर अपुष्ट मानहानिकारक सामग्री के प्रसार पर रोक लगाई है, लेकिन पहले से मौजूद पोस्ट और वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है. अदालत ने इस पहलू पर प्रतिवादियों को सुनने की जरूरत बताई है.