अमृतसर एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी का भंडाफोड़, जूतों और गहनों में छिपाकर लाया जा रहा था करोड़ों का गोल्ड
अमृतसर एयरपोर्ट पर कस्टम और डीआरआई ने महिला समेत तीन यात्रियों से करीब एक करोड़ रुपये का सोना बरामद किया. सोना जूतों में पेस्ट और कड़े-चेन के रूप में छिपाकर भारत लाया जा रहा था.
अमृतसर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी के तीन अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है. कस्टम विभाग और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की संयुक्त कार्रवाई में महिला समेत तीन यात्रियों को पकड़कर उनके कब्जे से करीब एक करोड़ रुपये मूल्य का सोना बरामद किया गया. तस्करी के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए थे. कहीं सोने को पेस्ट बनाकर जूतों में छिपाया गया, तो कहीं उसे कड़े और चेन का रूप देकर लाने की कोशिश की गई. मामले की जांच अब तस्करी के बड़े नेटवर्क तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ाई जा रही है.
जूतों में पेस्ट बनाकर छिपाया गया सोना
अधिकारियों के अनुसार, पहला मामला शारजाह से आई फ्लाइट संख्या 6E1428 से जुड़े एक यात्री का है. संदेह होने पर उसे रोका गया और एक्स-रे स्कैनिंग के साथ व्यक्तिगत तलाशी ली गई. जांच में उसके जूतों के भीतर छिपाया गया सोने का पेस्ट मिला. पेस्ट से शुद्ध सोना निकालने के बाद उसका वजन 150.04 ग्राम पाया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 22.05 लाख रुपये आंकी गई. शुरुआती जांच में सामने आया कि सोने को विशेष स्ट्रिप में पेस्ट के रूप में छिपाकर भारत लाया गया था ताकि सामान्य जांच में पकड़ से बचा जा सके.
महिला यात्री और तीसरे आरोपी से भी बड़ी बरामदगी
दूसरे मामले में शारजाह से फ्लाइट संख्या IX-138 से पहुंची एक महिला यात्री को जांच के लिए रोका गया. एक्स-रे स्कैनिंग के दौरान उसके पास से भी पेस्ट के रूप में सोना बरामद हुआ. शुद्धिकरण के बाद इसका वजन 90.21 ग्राम निकला, जिसकी कीमत करीब 13.26 लाख रुपये बताई गई. वहीं तीसरे मामले में मेलबर्न से कुआलालंपुर के रास्ते अमृतसर पहुंचे एक यात्री के पास से 24 कैरेट सोने के दो कड़े और एक चेन बरामद किए गए. इनका कुल वजन 484 ग्राम और अनुमानित कीमत 70.66 लाख रुपये आंकी गई है.
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अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू
कस्टम अधिकारियों ने तीनों मामलों में बरामद सोना जब्त कर संबंधित यात्रियों के खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन मामलों का संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय गोल्ड तस्करी गिरोह से तो नहीं है. अधिकारियों का मानना है कि एक जैसे तरीकों से लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए संगठित नेटवर्क की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी वजह से यात्रियों की यात्रा संबंधी जानकारी और संपर्कों की भी जांच की जा रही है.
कीमतों के अंतर का उठाते हैं फायदा
जांच एजेंसियों के अनुसार, शारजाह और दुबई दुनिया के प्रमुख गोल्ड ट्रेडिंग हब माने जाते हैं, जहां सोना भारत की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ता मिलता है. भारत में आयात शुल्क, जीएसटी और अन्य कर जुड़ने से इसकी कीमत बढ़ जाती है. इसी मूल्य अंतर का फायदा उठाने के लिए तस्कर यात्रियों को कैरियर बनाकर सोना देश में पहुंचाते हैं. बाद में इसे सर्राफा बाजार, अवैध कारोबारी नेटवर्क और हवाला चैनलों के जरिए खपाया जाता है, जिससे तस्करों को भारी आर्थिक लाभ मिलता है.