Punjab DA Case: आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट नाराज, चीफ सेक्रेटरी को किया तलब
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA-DR भुगतान के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने पिछले आदेशों के अनुपालन में कमी को देखते हुए पंजाब के मुख्य सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है.
पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते यानी DA और महंगाई राहत यानी DR के भुगतान को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने पहले दिए गए आदेशों के अनुपालन में कमी को देखते हुए पंजाब के मुख्य सचिव को 5 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है.
यह आदेश चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने DA और DR से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान दिया. हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पंजाब सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कोई संरक्षण मिल जाता है तो मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी की जरूरत नहीं होगी.
पहले भी दिया गया था DA-DR जारी करने का आदेश
इस मामले में हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी PSPCL को कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित DA और DR की किस्तें जारी करने का निर्देश दिया था. अदालत ने निर्देश दिया था कि लंबित किस्तों का भुगतान उन दरों के अनुरूप किया जाए, जो पंजाब में कार्यरत ऑल इंडिया सर्विसेज के IAS, IPS और IFS अधिकारियों पर लागू केंद्रीय दरों के मुताबिक हैं. बाद में अपीलों की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भुगतान की समयसीमा को संशोधित करते हुए भी सरकार और PSPCL को लंबित DA-DR किस्तें जारी करने का निर्देश बरकरार रखा.
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आदेश के पालन में देरी पर ब्याज का प्रावधान
अदालत के पहले के आदेश में यह भी कहा गया था कि तय समयसीमा में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज का सवाल लागू होगा. इसके साथ ही मुख्य सचिव को आदेश के अनुपालन से जुड़ी रिपोर्ट शपथपत्र के जरिए दाखिल करने के लिए कहा गया था. मामले की अगली सुनवाई में अदालत के सामने अनुपालन को लेकर सवाल उठे.
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. सरकार की ओर से मामले को कर्मचारियों के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की बात भी कही गई और अतिरिक्त समय मांगा गया. वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उनका मुख्य मुद्दा हाईकोर्ट के आदेश को लागू करवाना है. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को अपने आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार है, लेकिन इस कानूनी प्रक्रिया के कारण मामले को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता.