कांग्रेस हाईकमान करेगा चन्नी गुट की ताकत चेक, भूपेश बघेल 10 दिन के पंजाब दौरे पर
भूपेश बघेल जिला कार्यकारिणी, ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, 2022 विधानसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों, विधायकों और सांसदों से अलग-अलग बैठकें करेंगे. इन बैठकों में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होगी. साथ ही राहुल गांधी की प्रस्तावित रैलियों के स्थानों पर भी मंथन किया जाएगा.
पंजाब: पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी अब हाईकमान के लिए चिंता का विषय बन गई है. पार्टी हाईकमान ने ग्राउंड रियलिटी चेक करने का फैसला लिया है. कांग्रेस प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल कल यानी 30 जुलाई से 10 दिनों के पंजाब दौरे पर आएंगे. इस दौरान वे 18 जिलों में जाकर पार्टी की ताकत और कमजोरियों को परखेंगे.
भूपेश बघेल जिला कार्यकारिणी, ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, 2022 विधानसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों, विधायकों और सांसदों से अलग-अलग बैठकें करेंगे. इन बैठकों में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होगी. साथ ही राहुल गांधी की प्रस्तावित रैलियों के स्थानों पर भी मंथन किया जाएगा. कांग्रेस पंजाब में राहुल गांधी की चार बड़ी रैलियां कराने की योजना बना रही है.
आर-पार की लड़ाई
पार्टी सूत्रों के अनुसार हाईकमान गुटबाजी को जड़ से खत्म करने के मूड में है. भूपेश बघेल की रिपोर्ट के आधार पर संगठन में बड़े बदलाव हो सकते हैं. अगर जरूरी हुआ तो बागी गुट पर सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है. हाईकमान चाहता है कि राहुल गांधी की रैलियों से पहले पार्टी पूरी तरह एकजुट नजर आए.
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चन्नी गुट को झटका
चरणजीत सिंह चन्नी गुट को फिलहाल राहुल गांधी से मुलाकात का समय नहीं मिल रहा है. चन्नी गुट लगातार समय मांग रहा है, लेकिन राहुल गांधी के व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देकर टाल दिया जा रहा है. चन्नी समर्थक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 13 जुलाई के बाद उन्हें राहुल से मिलने का मौका मिलेगा और वे अपना पक्ष रख सकेंगे.
क्या होगा दौरा खास?
भूपेश बघेल पहले भी चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं. अब वे सीधे जिलों के स्तर पर जाकर नेता-कार्यकर्ताओं की राय लेंगे. बैठक में 2027 चुनाव की रणनीति, संगठन मजबूत करने और गुटबाजी खत्म करने पर फोकस रहेगा.
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य गुटों के बीच तनाव चल रहा है. हाईकमान अब इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है. भूपेश बघेल की इस 10 दिन की यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह रिपोर्ट सीधे हाईकमान को सौंपी जाएगी.