पंजाब के पूर्व मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन, सियालकोट से जालंधर तक ऐसा रहा सफर; कारोबार से पहुंचे पंजाब की सत्ता के शिखर तक
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन हो गया. सियालकोट से जालंधर पहुंचे भगत ने कारोबार, समाजसेवा और राजनीति में लंबा सफर तय किया.
पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत के निधन से जालंधर में शोक की लहर है. सियालकोट में जन्मे भगत ने विभाजन के बाद जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाया. यहां उन्होंने खेल सामान का कारोबार खड़ा किया और धीरे-धीरे सामाजिक जीवन में सक्रिय हुए. यही संपर्क आगे उनकी राजनीति का आधार बना. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर शुरुआत करने वाले भगत बाद में भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली.
सियालकोट से जालंधर तक संघर्ष का सफर
देश के विभाजन के बाद चुन्नी लाल भगत को सियालकोट से भारत आना पड़ा. जालंधर पहुंचकर उन्होंने मेहनत से अपना कारोबार खड़ा किया. शीला स्पोर्ट्स के जरिए उन्होंने खेल सामान के क्षेत्र में पहचान बनाई. कारोबार के दौरान शहर के सामाजिक और व्यावसायिक लोगों से उनका जुड़ाव बढ़ा. यही जनसंपर्क बाद में उनकी राजनीतिक ताकत बना और उन्होंने जालंधर को अपना प्रमुख आधार बनाया.
निर्दलीय चुनाव से शुरू हुई राजनीतिक पारी
भगत ने 1985 में पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा. उन्होंने जालंधर दक्षिण सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. इसके बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी नहीं बनाई. भाजपा से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन और जनसंपर्क पर काम जारी रखा. वर्ष 1997 में भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण से जीत दर्ज कर उन्होंने पहली बार पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया.
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लगातार जीत के बाद बढ़ा राजनीतिक कद
2007 में भगत ने जालंधर दक्षिण से दोबारा जीत हासिल की. परिसीमन के बाद 2012 में उन्होंने जालंधर पश्चिम सीट से चुनाव लड़ा और विजयी रहे. इससे पहले 2011 में उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया था. 2012 में भाजपा विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी भी मिली. इन पदों ने पार्टी और विधानसभा के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव को साफ किया.
बादल सरकार में संभाले कई विभाग
2012 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी तो चुन्नी लाल भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. उन्हें स्थानीय निकाय तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान जैसे विभाग मिले. बाद में वन एवं वन्यजीव संरक्षण और श्रम विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली. इस तरह जालंधर की राजनीति से निकले भगत ने राज्य सरकार में भी अहम भूमिका निभाई.