चंडीगढ़ में आत्मदाह करने वाली युवती आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई. 12 दिनों तक पीजीआई की बर्न यूनिट में मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार उसकी सांसें थम गईं. युवती का चेहरा, हाथ, सीना, और शरीर का बड़ा हिस्सा आग में गंभीर रूप से झुलस गया था. डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही. इलाज के दौरान भी युवती का हौसला टूट नहीं रहा था. वह बार-बार अपने परिजनों से कह रही थी, मैं जीना चाहती हूं. हालांकि न्याय की लड़ाई लड़ने का उसका सपना अधूरा रह गया.
युवती की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है. भाई समेत अन्य परिजनों ने कहा है कि वे आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
इलाज के दौरान युवती ने अपनी आपबीती सुनाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. उसने कहा था कि जब वह आग की लपटों में घिरी हुई थी, तब वहां मौजूद पुलिसकर्मी कार्रवाई करने के बजाय वीडियो बनाने में लगे थे. युवती के अनुसार उसने पहले ही पुलिस को आत्मदाह की चेतावनी दी थी और कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई. उसने बताया कि खुद को आग लगाने के बाद उसकी चीख सुनकर आसपास खेल रहे कुछ युवक मौके पर पहुंचे, लेकिन पुलिस कर्मियों ने उन्हें भी वहां से भगा दिया.
युवती ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी कह रहे थे कि पहले औपचारिकताएं पूरी करो, फिर शिकायत दर्ज की जाएगी. पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता समझी होती तो मैं भी जिंदा रहती. लेकिन सुनवाई न होने के बाद टूटी युवती ने आखिरकार मजबूरी में आत्मदाह जैसा कदम उठा लिया.