रात होते ही क्यों बढ़ जाती है इन 20 इलाकों की निगरानी? HIV को लेकर चंडीगढ़ का अनोखा मिशन चर्चा में

चंडीगढ़ में HIV संक्रमण की रोकथाम के लिए 20 संवेदनशील इलाकों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया है. स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें रात में इन क्षेत्रों में पहुंचकर जांच, काउंसिलिंग और जागरूकता अभियान चला रही हैं.

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Reepu Kumari

चंडीगढ़ में HIV संक्रमण की पहचान और रोकथाम के लिए शुरू किया गया एक विशेष अभियान इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है. शहर के 20 ऐसे इलाकों को चिह्नित किया गया है, जहां संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है. इन क्षेत्रों में रात के समय स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय रहकर लोगों तक पहुंच बना रही हैं और जांच के साथ जागरूकता अभियान भी चला रही हैं. दिन के समय सामान्य दिखाई देने वाले कई इलाके रात में स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बन जाते हैं.

अधिकारियों का मानना है कि कई लोग सामाजिक झिझक और गोपनीयता की चिंता के कारण दिन में जांच नहीं कराते. इसी वजह से रात के समय विशेष अभियान चलाकर अधिक लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है. इस पहल को देश में अपनी तरह का पहला मॉडल माना जा रहा है.

रात में चल रहा विशेष स्वास्थ्य अभियान

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ‘रास’ यानी रात्रि एड्स सुरक्षा अभियान के तहत विशेष टीमें शाम सात बजे से रात 12 बजे तक संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचती हैं. यहां लोगों की HIV जांच, परामर्श और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. अभियान का मुख्य उद्देश्य संक्रमण की समय रहते पहचान करना और लोगों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है. जांच के दौरान गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाता है.


जांच में सामने आए अहम आंकड़े

विभागीय आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के अंत तक 16 हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 5,162 लोगों की जांच की जा चुकी है. इनमें 1,369 लोग संदिग्ध श्रेणी में पाए गए, जबकि 55 लोगों में HIV संक्रमण की पुष्टि हुई है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच और उपचार से संक्रमण के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इसी कारण अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है.

किन क्षेत्रों में सबसे अधिक जोखिम

जांच के दौरान स्पा सेंटर, बस स्टैंड और कुछ बाजार क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील पाए गए हैं. संक्रमण की पुष्टि वाले मामलों में सेक्स वर्करों, ट्रांसपोर्ट वर्करों और अन्य उच्च जोखिम समूहों की संख्या अधिक दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन समूहों तक सीधे पहुंच बनाकर संक्रमण की श्रृंखला को रोकने में मदद मिल सकती है.

राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान

कजहेड़ी, धनास, डड्डूमाजरा, इंदिरा कॉलोनी, विकास नगर, रामदरबार, मौलीजागरां, बुड़ैल और सेक्टर-43 बस स्टैंड सहित 20 क्षेत्रों में नियमित निगरानी जारी है. स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. सद्भावना पंडित के अनुसार यह मॉडल राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की सराहना प्राप्त कर चुका है. दिल्ली भी इस व्यवस्था को अपनाने की दिशा में काम कर रही है, जबकि अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है.