किसान को 78 लाख के चेक बाउंस केस में मिली बड़ी राहत, कोर्ट में बैंक की दलील नहीं टिकी
चंडीगढ़ जिला अदालत ने 78 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में फतेहगढ़ साहिब के किसान नरिंदर सिंह को बरी कर दिया. अदालत में बैंक अपने आरोपों को साबित नहीं कर सका. बचाव पक्ष ने दलील दी कि विवादित चेक पुराने आइएनजी व्यासा बैंक के समय सुरक्षा के लिए दिया गया था और विलय के बाद उसका इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया.
चंडीगढ़ जिला अदालत का फैसला पंजाब के एक किसान के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. फतेहगढ़ साहिब के अमलोह निवासी नरिंदर सिंह पर कोटक महिंद्रा बैंक ने 78 लाख रुपये के चेक बाउंस होने का मुकदमा दर्ज कराया था. बैंक का कहना था कि किसान ने किसान क्रेडिट सीमा के तहत ली गई रकम नहीं चुकाई, जिसके चलते ब्याज समेत बकाया 78 लाख रुपये हो गया. मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने चेक की वैधता पर सवाल उठाए.
पुराने बैंक से जुड़ा था मामला
नरिंदर सिंह के वकील गौरव सहोता ने अदालत में बताया कि किसान ने किसान क्रेडिट सीमा आइएनजी व्यासा बैंक से ली थी. बाद में वर्ष 2015 में यह बैंक कोटक महिंद्रा बैंक में विलय हो गया. उनके मुताबिक विवादित चेक आइएनजी व्यासा बैंक को केवल सुरक्षा के तौर पर दिया गया था, जिसका बाद में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया.
बैंक ने लगाया था 78 लाख का दावा
बैंक की ओर से अदालत में कहा गया कि नरिंदर सिंह ने 58 लाख रुपये की किसान क्रेडिट सीमा ली थी, लेकिन निर्धारित भुगतान नहीं किया. ब्याज जुड़ने के बाद यह राशि 78 लाख रुपये हो गई. बैंक के अनुसार इसी बकाया रकम के बदले किसान ने चेक दिया था, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक वापस हो गया.
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2016 के बाद पुराने चेक पर सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत का ध्यान बैंक की ओर से जारी उस सूचना की तरफ दिलाया, जिसमें कहा गया था कि 28 फरवरी 2016 के बाद आइएनजी व्यासा बैंक के पुराने चेक से लेनदेन नहीं किया जाएगा. वकील ने कहा कि इसके बावजूद वर्ष 2020 में उसी पुराने चेक का इस्तेमाल किया गया. चेक किसान की सहमति के बिना इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया.
अदालत ने किसान को किया बरी
बचाव पक्ष की दलीलों में चेक की वैधता अहम मुद्दा रही. अदालत ने मामले में पेश तथ्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद नरिंदर सिंह को आरोप से बरी कर दिया. इस फैसले के साथ 78 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में किसान को बड़ी कानूनी राहत मिली. बचाव पक्ष ने इसे बैंक के दावे पर महत्वपूर्ण सवाल उठाने वाला फैसला बताया.