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पंजाब में AP ढिल्लों गिरफ्तार! 114 साल के मैराथन धावक फौजा सिंह को कार से मारी थी टक्कर

पंजाब के जालंधर में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में 114 वर्षीय प्रसिद्ध मैराथन धावक फौजा सिंह की मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने कनाडा से आए एनआरआई अमृतपाल सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार किया है, जो हादसे के बाद फरार हो गया था. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और गाड़ियों की जांच के बाद आरोपी की पहचान की. आरोपी को 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

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Kuldeep Sharma

दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक माने जाने वाले फौजा सिंह का निधन एक हिट एंड रन हादसे में हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. वह 100 साल की उम्र में फुल मैराथन पूरी करने वाले पहले व्यक्ति थे. जालंधर-पठानकोट हाइवे पर सोमवार को एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मारी थी. पुलिस जांच में सामने आया कि यह वाहन कनाडा से आया एक युवक चला रहा था, जिसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है.

घटना सोमवार दोपहर 3:08 बजे के आसपास जालंधर-पठानकोट हाइवे पर स्थित ब्यास गांव के बाहर हुई, जब फौजा सिंह खेत और ढाबे की ओर पैदल जा रहे थे. टक्कर लगने से उनका शरीर करीब 6-7 फीट हवा में उछल गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने वाहन की पहचान नहीं की, लेकिन शक था कि वह इनोवा या टोयोटा फॉर्च्यूनर हो सकती है. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और करीब 35 गाड़ियों की जांच की. एक फॉर्च्यूनर पर शक गहराया, जिसके बाएं हेडलाइट के टूटे हिस्से मौके से मिले थे.

आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया

पुलिस ने गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से मालिक की पहचान की, जो कपूरथला के अथौली गांव का निवासी वरिंदर सिंह निकला. पूछताछ में उसने बताया कि उसने यह गाड़ी अमृतपाल सिंह ढिल्लों को बेची थी, जो हाल ही में कनाडा से आया है. अमृतपाल, जो 26 वर्ष का है, कनाडा में वर्क परमिट पर है और जून के अंत में पंजाब लौटा था. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने फौजा सिंह को टक्कर मारी और डर के कारण मौके से भाग गया. पुलिस ने आरोपी गाड़ी को बरामद कर लिया है. इसके साथ ही उस पर धारा 281 और 105 (भारत न्याय संहिता) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

फौजा सिंह की प्रेरणादायक जीवनगाथा और अंतिम विदाई

फौजा सिंह, जिन्हें दुनिया “टरबनड टॉरनाडो” के नाम से जानती थी, का जीवन संघर्षों और उपलब्धियों से भरा रहा. 2000 से 2013 तक उन्होंने 9 फुल मैराथन पूरी कीं. अपने जीवन में पत्नी, बेटी और बेटे को खोने के बाद वे अवसाद में चले गए थे, लेकिन उनके बेटे सुखविंदर सिंह उन्हें यूके ले गए, जहां उन्होंने दौड़ना शुरू किया और अंतरराष्ट्रीय पहचान पाई. फौजा सिंह के दो बेटे और दो बेटियां हैं, जो विदेश में बसे हुए हैं. उनका अंतिम संस्कार उनके परिजनों के आने के बाद किया जाएगा. गांव वालों और परिजनों ने फौजा सिंह को शांत और अनुशासित व्यक्ति के बताया. वे हर रोज 3 घंटे पैदल चलते थे और खुद के काम खुद करते थे.