100 साल की उम्र में निभाया जीवन का सबसे बड़ा वादा, निधन के बाद भी मानवता के नाम कर गईं अमूल्य उपहार
पंजाब के बरनाला जिले के गांव संघेड़ा की 100 वर्षीय अंग्रेज कौर इंसां ने निधन के बाद अपना पार्थिव शरीर चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान कर मानव सेवा की मिसाल पेश की.
बरनाला: पंजाब के बरनाला जिले के गांव संघेड़ा से मानवता की प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है. यहां 100 वर्षीय अंग्रेज कौर इंसां ने अपने निधन के बाद देहदान कर चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देने का संकल्प पूरा किया. परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर शोध कार्य के लिए समर्पित कर दिया. इस फैसले की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है और लोग इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम मान रहे हैं. अंग्रेज कौर इंसां ने जीवनकाल में देहदान का संकल्प लिया था. बुधवार रात करीब 10 बजे उनके निधन के बाद पुत्र हरबंस सिंह इंसां, गुरजंट सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी इच्छा के अनुरूप देहदान की प्रक्रिया पूरी कराई. इसके साथ ही वह गांव संघेड़ा की दूसरी और बरनाला ब्लॉक की 74वीं देहदाता बन गईं.
परिवार ने अंतिम इच्छा का किया सम्मान
परिजनों के अनुसार अंग्रेज कौर इंसां 100 वर्ष की आयु में भी स्वस्थ थीं. उनके निधन के बाद परिवार ने बिना किसी देरी के उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया. अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में रिश्तेदार, ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए. सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मानव सेवा के इस निर्णय को प्रेरणादायक बताया.
अर्थी को बेटों के साथ बेटियों और बहुओं ने भी दिया कंधा
अंतिम यात्रा के दौरान डेरा सच्चा सौदा के 'बेटी बेटा एक समान' अभियान की झलक भी देखने को मिली. बेटों के साथ बहुओं और बेटियों ने भी अर्थी को कंधा दिया. इसके बाद पार्थिव शरीर को एंबुलेंस के जरिए चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के लिए रवाना किया गया. पूरे माहौल में श्रद्धा और सम्मान का भाव दिखाई दिया.
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नारों के बीच दी गई अंतिम विदाई
अंतिम यात्रा के दौरान मौजूद लोगों ने 'माता अंग्रेज कौर इंसां अमर रहें' जैसे नारों के साथ उन्हें विदाई दी. इस अवसर पर कुलविंदर इंसां, सुखदेव इंसां, भोला सिंह इंसां, प्रेम इंसां, सुखबीर सिंह इंसां, जग्गा इंसां, राजा सिंह इंसां सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
पति भी कर चुके थे देहदान
हरबंस सिंह इंसां ने बताया कि उनकी माता ने वही संकल्प पूरा किया, जिसे उनके पिता जोरा सिंह भी निभा चुके थे. उन्होंने कहा कि दोनों माता पिता ने जीवनभर मानव सेवा को महत्व दिया और निधन के बाद भी समाज के लिए प्रेरणा छोड़ गए. परिवार ने इसे गर्व का विषय बताया.
झज्जर के मेडिकल संस्थान को सौंपा गया पार्थिव शरीर
डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने बताया कि अंग्रेज कौर इंसां का पार्थिव शरीर हरियाणा के झज्जर स्थित वर्ल्ड कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च हॉस्पिटल को चिकित्सा अनुसंधान के लिए सौंपा गया. उनका कहना है कि संस्था के अनुयायी मानव सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और देहदान भी उसी सोच का हिस्सा है.