'अधिकारी चैन से कैसे सो सकते हैं', प्रदूषण में मुंबई के दिल्ली से आगे निकलने पर बोला बॉम्बे हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रीयता संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

pinterest
Sagar Bhardwaj

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की घराब वायु गुणवत्ता पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि प्रदूषण के मामले में शहर ने दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है.

कोर्ट ने त्योहार के समय में ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने की दिशा में प्रभावी कदम लागू करने में असफल रहने को लेकर मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और बीएमसी की कड़ी आलोचना की.

अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं

रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे जलाने और ध्वनि प्रदूषण को लेकर  स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस गिरीश एस कुलकर्णी और नीला गोखले की बेंच ने सवाल किया कि जब लाखों लोग खराब वायु गुणवत्ता से जूझ रहे हैं तब कैसे प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने वाले अधिकारी चैन की नींद सो सकते हैं.


अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है

कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे अधिकारियों को अपनी ड्यूटी ना निभाने को लेकर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. न्यायधीशों ने पाया कि पुलिस कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में धीमी रही है जिसमें जुलूसों के दौरान उपयोग होने वाले साउंड सिस्टम्स के लिए लाइसेंस प्रदर्शित करना और त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने  पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना शामिल है.

यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

मंगलवार की एक घटना का जिक्र करते हुए जिसमें साउथ मुंबई में क्राफर्ड बाजार के निकट एक व्यस्त सड़क पर एक पुलिस स्टेशन के सामने पटाखे छोड़े गए, कोर्ट ने कहा कि यह साफ तौर पर आदेशों का उल्लंघन है. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रीयता संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

अधिकारियों के साथ बैठक करें मुंबई पुलिस कमिश्नर

कोर्ट ने कहा कि मुंबई पुलिस कमिश्नर सभी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी थानों के अध्यक्षों के साथ एक बैठक करें. कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर और MPCB कमिश्नर को 26 अक्तूबर को होने वाली अगली सुनवाई में उपस्थित रहने और प्रदूषण कंट्रोल की दिशा में उठाए कदमों पर रिपोर्ट पेश करने को कहा.

कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को खबरों, सोशल मीडिया और सैलेब्रिटी कैंपेन के जरिए ध्वनि प्रदूषण और पटाखों से होने वाले प्रदूषण के खतरनाक प्रभावों के बारे में लोगों को शीक्षित करना चाहिए. जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि यह बहुत ही चिंता जनक है कि समुद्र का किनारा और समुद्री हवा के बावजूद मुंबई को गंभीर प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है.

साफ इलाकों के डेटा का इस्तेमाल ना करें

उन्होंने धूल प्रदूषण करने वाले निर्माणा स्थलों पर पर्याप्त कार्रवाई ना करने को लेकर भी नगर निगम की कड़ी आलोचना की. कोर्ट ने कहा कि निर्माणकर्ताओं पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए. जस्टिस गोखले ने कहा कि शहर के साफ इलाकों के प्रदूषण के आंकड़ों का इस्तेमाल भीषण जाम और ज्यादा आबादी वाले इलाकों की खराब वायु गुणवत्ता को छुपाने के लिए नहीं किया जा सकता है.

लोगों के व्यवहार को बदलने की जरूरत

कोर्ट ने मंगलवार को धुंध के कारण दृश्यता के 500 मीटर नीचे जाने पर भी चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि घर से बाहर निकलते वक्त लोगों को AQI चेक करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए लोगों के व्यवहार को बदलने की जरूरत है.