CM फडणवीस ने 500 से ज्यादा कर्मचारियों को हटाया, मंत्रालयों में बिना जांच नौकरी पर गिरी गाज
महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के कार्यालयों में बिना उचित सत्यापन काम कर रहे 550 से अधिक कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया है. यह कार्रवाई नियुक्तियों की प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर की गई है.
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने मंत्रियों के कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों को लेकर सख्त कदम उठाया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में हुई कार्रवाई के तहत आउटसोर्सिंग, प्रतिनियुक्ति और अनौपचारिक मौखिक आदेशों के जरिए तैनात 550 से अधिक कर्मचारियों को मूल विभागों में लौटने को कहा गया. सरकार ने साफ किया कि जरूरी मंजूरी और सत्यापन के बिना हुई नियुक्तियों को आगे जारी नहीं रखा जाएगा.
मुख्यमंत्री कार्यालय समेत 40 मंत्री कार्यालयों में कुल 904 अस्थायी पद मंजूर किए गए थे. इनमें से 549 पद ही तय प्रक्रिया के तहत भरे गए थे. बाकी पदों पर नियुक्त कर्मचारियों का पूरा सत्यापन नहीं हुआ था या उनकी नियुक्ति औपचारिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी.
10 सितंबर तक लौटने का आदेश
जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने 25 अगस्त 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया था. इसमें कहा गया कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी मंजूरी के बिना हुई है या जिनका बैकग्राउंड और ईमानदारी संबंधी सत्यापन पूरा नहीं हुआ, उन्हें 10 सितंबर तक अपने मूल विभाग में लौटना होगा. ऐसा नहीं करने पर वेतन रोकने की चेतावनी दी गई.
Also Read
मौखिक आदेशों पर भी लगाम
सरकार की कार्रवाई में उन कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, जो आउटसोर्सिंग, प्रतिनियुक्ति या मौखिक निर्देशों के आधार पर मंत्री कार्यालयों में काम कर रहे थे. इस कदम का उद्देश्य ऐसी अनौपचारिक नियुक्तियों पर रोक लगाना है. सरकार अब नियुक्तियों की प्रक्रिया को तय नियमों के तहत रखने पर जोर दे रही है.
मुख्यमंत्री की मंजूरी होगी जरूरी
यह बदलाव महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस 2026 में किए गए प्रशासनिक बदलावों से भी जुड़ा है. नए प्रावधानों के तहत मंत्रियों के फैसलों पर मुख्यमंत्री की भूमिका मजबूत हुई है. कर्मचारियों की नई नियुक्तियों में मुख्यमंत्री कार्यालय की जांच और अंतिम मंजूरी को महत्वपूर्ण बनाया गया है.
मंत्री कार्यालयों पर बढ़ेगी निगरानी
इस फैसले से राज्य के मंत्री कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति और तैनाती की प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है. सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि भविष्य में किसी कर्मचारी की नियुक्ति बिना जरूरी मंजूरी, जांच और सत्यापन के न हो. इससे लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक नियुक्ति व्यवस्था पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है.