उज्जैन में जलती चिता से मांस खाने का वीडियो वायरल, ‘लेडी अघोरी’ काली नंद गिरी गिरफ्तार

उज्जैन में जलती चिता से कथित तौर पर मांस खाने का वीडियो वायरल होने के बाद काली नंद गिरी को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने BNS की धारा 301 में केस दर्ज किया है.

@labheshghosh
Sagar Bhardwaj

उज्जैन में जलती चिता के पास से कथित तौर पर मांस उठाकर खाने वाली एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. महिला की पहचान काली नंद गिरी के रूप में बताई जा रही है. वह खुद को अघोरी बताती हैं और सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के नाम से सक्रिय हैं.

 पुलिस ने किया गिरफ्तार

वीडियो सामने आने के बाद श्मशान घाट में रहने वाले तांत्रिक विष्णुनाथ महाराज ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके आधार पर पुलिस ने BNS की धारा 301 के तहत मामला दर्ज किया और काली नंद गिरी को गिरफ्तार कर लिया. उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.


काली नंद गिरी की पहचान को लेकर दावा

एक मीडिया चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक विष्णुनाथ महाराज का दावा है कि काली नंद गिरी पहले पुरुष थीं और उनका नाम अल्लूरी श्रीनिवास था. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने बाद में जेंडर परिवर्तन कराया और सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के नाम से पहचान बनाई. हालांकि, इन व्यक्तिगत जानकारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

शादी और तांत्रिक अनुष्ठान के आरोप

काली नंद गिरी पर पहले भी गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है. एक महिला वर्षिणी ने दावा किया कि वह अघोरी साधना और तांत्रिक विद्या सीखने आई थी, लेकिन उस पर दबाव डालकर शादी कराई गई. एक अन्य युवती ने भी अल्लूरी श्रीनिवास से शादी का दावा किया था.

10 लाख रुपये लेने का भी आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार काली नंद गिरी पर एक महिला से कथित तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर 10 लाख रुपये लेने का आरोप भी लगाया गया है. इन पुराने मामलों में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी.

 पुलिस कर रही आरोपों की जांच

चिता से मांस खाने का मामला सामने आने के बाद काली नंद गिरी की गिरफ्तारी हुई है. उनके पुराने मामलों और अन्य आरोपों की भी जांच की जा रही है. पुराने आरोपों और उनकी व्यक्तिगत पहचान से जुड़े कई दावे मीडिया रिपोर्ट्स और लोगों के बयानों पर आधारित हैं, इसलिए उन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता.