'बेगम बनकर हिंदू धर्म भूल गईं क्या?', शर्मिला टैगोर के वंदे मातरम वाली टिप्पणी पर मुकेश खन्ना ने लगाई क्लास, शादी पर उठाए सवाल
मुकेश खन्ना ने हाल ही में वंदे मातरम् को लेकर चल रही चर्चा पर अपनी स्पष्ट राय रखी है. उनकी यह प्रतिक्रिया सीनियर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान के जवाब में आई है.
Mukesh Khanna Lashes Out At Sharmila Tagore: शक्तिमान फेम एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में वंदे मातरम् को लेकर चल रही चर्चा पर अपनी स्पष्ट राय रखी है. उनकी यह प्रतिक्रिया सीनियर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान के जवाब में आई है. शर्मिला टैगोर ने कथित तौर पर कहा था कि भारत की धार्मिक विविधता और अलग-अलग आस्थाओं वाले लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वंदे मातरम् के पूरे गीत के बजाय सिर्फ शुरुआती अंश ही गाए जाने चाहिए.
'बेगम बनकर हिंदू धर्म भूल गईं क्या?'
मुकेश खन्ना से जब इस मुद्दे पर पूछा गया तो उन्होंने सीधा सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि शर्मिला टैगोर अपनी समझ के हिसाब से बात कर रही हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। शायद अपना दृष्टिकोण समझाते हुए वे यह कह गईं कि दूसरे धर्मों के लोग इसे स्वीकार नहीं कर सकते. मुकेश खन्ना ने साफ कहा कि दूसरे धर्मों की चिंताओं को वंदे मातरम् के साथ जोड़ने की जरूरत क्यों है.
शर्मिला टैगोर के वंदे मातरम वाली टिप्पणी पर मुकेश खन्ना ने लगाई क्लास
इसके बाद मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर की शादी का जिक्र किया. उन्होंने याद दिलाया कि शर्मिला टैगोर ने पटौदी परिवार में शादी के बाद आयशा बेगम का नाम अपनाया था. मुकेश ने कहा- 'क्या आपको शादी के बाद ही एहसास हुआ कि इस्लाम भी मौजूद है? जब आप बेगम बनीं तब आपको पता चला कि मुसलमान अलग आस्था रखते हैं? आप शादी के लिए आयशा बेगम बनीं, लेकिन आज आप आयशा बेगम बनकर बात कर रही हैं. मुझे हैरानी है कि हिंदू धर्म के साथ पूरा जीवन जीने के बाद अचानक आपको दूसरे धर्मों की चिंता सताने लगी.'
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मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर की बंगाली पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आप बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां काली पूजा बड़े पैमाने पर मनाई जाती है. आप बंगाली संस्कृति और बंगाली फिल्मों के साथ बड़ी हुई हैं. फिर अचानक अब क्यों लगता है कि दूसरे धर्म के लोग इसे स्वीकार नहीं कर सकते?
यह बयान सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन गया है. मुकेश खन्ना लंबे समय से अपने स्पष्ट और बिना लाग-लपेट वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं. वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रगान से जुड़े मुद्दे पर उनका यह रुख कई लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है.