कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी करने वाले मंत्री विजय शाह को 'सुप्रीम' फटकार, माफीनामा किया नामंजूर, SIT करेगी जांच

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आपने जिस तरह की अभद्र टिप्पणी की, वह पूरी तरह से बिना सोचे समझे की गई. आपको ईमानदारी से प्रयास करने से किसने रोका? हमें आपकी माफी की आवश्यकता नहीं है. हम जानते हैं कि कानून के अनुसार कैसे निपटना है.

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Gyanendra Sharma

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की कर्नल अधिकारी सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई 'अभद्र टिप्पणी' के लिए माफ़ी को खारिज कर दिया. कुरैशी उन तीन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं, जो पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया को जानकारी दे रहे थे. कोर्ट ने मंत्री को फटकार लगाते हुए माफ़ी को 'घड़ियाली आंसू' करार दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी 'पूरी तरह से विचारहीन' थी.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, वह माफ़ी कहां है? वह माफ़ी क्या है? आपने किस तरह की माफ़ी मांगी है? माफ़ी का कुछ मतलब होता है! कभी-कभी लोग कार्यवाही से बचने के लिए विनम्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं! और कभी-कभी वे मगरमच्छ के आंसू बहाते हैं! आपकी माफ़ी किस तरह की है?

अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और पुलिस से मामले की स्थिति के बारे में भी पूछा. भारत द्वारा सीमा पार आतंकी शिविरों पर हमला करने के बाद, शाह ने कहा था कि पाकिस्तान में मौजूद लोगों के "समान समुदाय" की एक महिला को देश को नंगा करने के लिए भेजा गया था. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को कर्नल सोफिया कुरैशी के लिए निर्देशित माना जा रहा है, जो ऑपरेशन सिंदूर ब्रीफिंग के दौरान सशस्त्र बलों के चेहरों में से एक थीं.

इससे भारी राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था, तथा विपक्ष, सैन्य दिग्गजों और यहां तक ​​कि कुछ भाजपा सदस्यों ने भी इसकी आलोचना की थी. मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शाह को "गटर की भाषा" का प्रयोग करने के लिए फटकार लगाई थी तथा नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था.