राज्यसभा चुनाव में बड़ा मोड़! मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर SC ने नहीं दी राहत, कल होगी अहम सुनवाई

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को तुरंत राहत नहीं मिली है. अदालत ने आज सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को कल के लिए टाल दिया है.

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Kuldeep Sharma

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं लेकिन कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को देश की सबसे बड़ी अदालत से फौरी तौर पर कोई राहत नहीं मिल सकी है. रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उनका नामांकन पर्चा खारिज किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिस पर अदालत ने तुरंत कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया है. आज नामांकन प्रक्रिया और नाम वापसी का अंतिम दिन होने के कारण कांग्रेस पार्टी इस मामले पर तुरंत कानूनी हस्तक्षेप चाहती थी परंतु शीर्ष अदालत ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत दलीलें सुनने के लिए अगली तारीख तय कर दी है.

अदालत में तत्काल सुनवाई की मांग और इनकार

जस्टिस प्रशांत कुमार की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय अवकाशकालीन पीठ के सामने जब मीनाक्षी नटराजन की याचिका को मेंशन किया गया तो कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कमान संभाली. उन्होंने बेंच को दलील दी कि आज ही चुनाव प्रक्रिया के तहत नाम वापस लेने का आखिरी मौका है इसलिए अदालत को रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर तुरंत रोक लगानी चाहिए. 

सिंघवी ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित मामले में अभी तक किसी कोर्ट ने न तो संज्ञान लिया है और न ही आरोप तय हुए हैं इसलिए नामांकन रद्द करना गलत है. दूसरी तरफ रिटर्निंग ऑफिसर का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस मांग का कड़ा विरोध किया जिसके बाद कोर्ट ने 'अशोक कुमार मामले' के कानूनी प्रावधानों का जिक्र करते हुए याचिकाकर्ता को अगले दिन आने को कहा.


चुनाव आयोग से निराशा के बाद खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

सुप्रीम कोर्ट में इस रिट याचिका को दायर करने से ठीक पहले कांग्रेस ने प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे प्रयास किए थे. बुधवार को कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी और रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के निर्णय को चुनौती दी थी. हालांकि काफी इंतजार के बाद भी जब चुनाव आयोग की तरफ से इस शिकायत पर कोई ठोस जवाब या राहत नहीं मिली तब जाकर कांग्रेस आलाकमान ने न्यायिक शरण में जाने का फैसला किया. रिटर्निंग ऑफिसर ने फॉर्म-26 में तेलंगाना के एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आधार बनाकर नटराजन का पर्चा निरस्त किया था जिसे अब सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच के समक्ष चुनौती दी गई है.

क्या है फॉर्म-26 का नियम

चुनावी नियमों के मुताबिक देश में किसी भी सदन का चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार के लिए फॉर्म-26 के जरिए अपने वित्तीय और आपराधिक इतिहास का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होता है. इस वैधानिक फॉर्म का कोई भी कॉलम खाली छोड़ना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और यदि किसी प्रत्याशी पर कोई मुकदमा नहीं है तो उसे वहां स्पष्ट रूप से 'शून्य' या 'लागू नहीं' लिखना पड़ता है. मीनाक्षी नटराजन के मामले में रिटर्निंग अधिकारी का मानना था कि उन्होंने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मुकदमे की बात छिपाई है जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है. अब इस पूरे विवाद का भविष्य सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और जजों के रुख पर निर्भर करता है जिसने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं.