Raktanchal 3 Ankit Raj Exclusive: रोज झेले रिजेक्शन, रेलवे स्टेशन पर सामान उठाकर चलाया खर्च; अब OTT का जाना-पहचाना चेहरा हैं अंकित राज
रक्तांचल 3 के अभिनेता अंकित राज ने इंडिया डेली 24x7 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अपने संघर्ष, मुंबई के शुरुआती दिनों, धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म Yodha, थिएटर और एक्टिंग करियर से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए.
मुंबई: इन दिनों OTT पर Raktanchal 3 जबरदस्त चर्चा में है. दमदार कहानी, शानदार निर्देशन और बेहतरीन कलाकारों की वजह से यह वेब सीरीज दर्शकों का खूब प्यार बटोर रही है. सीरीज में 'गगन श्रीवास्तव' के किरदार में नजर आ रहे अभिनेता अंकित राज ने अपनी शानदार एक्टिंग से हर किसी का ध्यान खींचा है. उनके दमदार एक्सप्रेशंस, बेहतरीन डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस ने इस किरदार को यादगार बना दिया है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी उनके अभिनय की जमकर तारीफ हो रही है.
लेकिन सफलता की यह चमक रातोंरात नहीं मिली. इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, अनगिनत रिजेक्शन और कभी हार न मानने का जज्बा छिपा है. बिहार के एक छोटे शहर से निकलकर मुंबई तक का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था. कई बार उन्हें लगा कि शायद उनका सपना अधूरा रह जाएगा, लेकिन उन्होंने खुद पर भरोसा नहीं छोड़ा. इंडिया डेली 24x7 से खास बातचीत में अंकित राज ने अपने बचपन, थिएटर, इंजीनियरिंग, क्रिकेट, मुंबई के संघर्ष और अपने करियर के सबसे अहम प्रोजेक्ट Raktanchal 3 तक की पूरी यात्रा खुलकर साझा की.
इंजीनियरिंग के बाद भत्री थिएटर में ही लगा रहा दिल
12वीं के बाद अंकित ने इंजीनियरिं में दाखिला लिया. हालांकि उनका कहना है कि इंजीनियरिंग कभी उनका सपना नहीं थी. उन्हें थिएटर करना था और इसी वजह से उन्होंने कॉलेज में ड्रामा कोटा के जरिए थिएटर को भी जारी रखा. कॉलेज के दौरान उन्होंने छह साल तक लगातार थिएटर किया. इसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि अब उन्हें फिल्मों में अपनी किस्मत आजमानी चाहिए. उनके थिएटर गुरु ने उन्हें पहले बेंगलुरु भेजा, जहां उन्होंने कैमरे के पीछे काम करना सीखा. यही अनुभव बाद में मुंबई में उनके बहुत काम आया.
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बहुत कम लोग जानते हैं कि अंकित राज सिर्फ अभिनेता ही नहीं बल्कि अच्छे क्रिकेटर भी रहे हैं. उन्होंने रेलवे की ओर से क्रिकेट खेला और एक समय दोनों करियर साथ-साथ चल रहे थे. हालांकि उन्हें जल्द समझ आ गया कि क्रिकेट में उम्र बहुत मायने रखती है, जबकि अभिनय में खुद को लगातार बेहतर बनाया जा सकता है. इसके बाद उन्होंने पूरी तरह अभिनय को अपना लक्ष्य बना लिया.
मुंबई आने से पहले बॉलीवुड को लेकर था डर
अंकित बताते हैं कि फिल्मों और लोगों से सुनी कहानियों की वजह से उन्हें मुंबई आने से डर लगता था. उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए कई गलत रास्तों से गुजरना पड़ता है. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. बेंगलुरु में काम करके उन्होंने करीब 45 हजार रुपये बचाए और सिर्फ 10 दिन के ट्रायल के लिए मुंबई आ गए. लेकिन यहां पहुंचते ही उनका एटीएम कार्ड काम नहीं कर रहा था. उन्हें दादर स्टेशन पर रात बितानी पड़ी. बाद में फेसबुक के जरिए एक पुराने दोस्त ने उनकी मदद की और उन्होंने अपने संघर्ष की नई शुरुआत की.
मुंबई में शुरुआत आसान नहीं थी. अंकित ने नालासोपारा में छोटा कमरा लिया क्योंकि शहर के अंदर रहना उनके बजट से बाहर था. रोज लोकल ट्रेन पकड़कर ऑडिशन देना, घंटों सफर करना और फिर बिना काम के वापस लौटना उनकी दिनचर्या बन गई. उनका कहना है कि मुंबई में सिर्फ अभिनय सीखना काफी नहीं है, यहां सर्वाइव करना भी एक कला है. उन्होंने कहा कि अगर परिवार का थोड़ा आर्थिक सहारा न हो तो लंबे समय तक संघर्ष करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
रोज झेलते थे 10 से 12 रिजेक्शन
मुंबई में संघर्ष का सबसे कठिन दौर वह था जब अंकित राज रोज ऑडिशन देने जाते थे, लेकिन उन्हें अभिनय दिखाने का मौका भी नहीं मिलता था. कई बार कास्टिंग टीम सिर्फ उनके लुक्स देखकर ही कह देती थी कि वे इस किरदार के लिए फिट नहीं हैं. अंकित बताते हैं कि शुरुआती पांच महीनों तक उन्हें लगभग हर दिन 10 से 12 बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. कभी कहा जाता कि उम्र मैच नहीं करती, कभी रंग-रूप, तो कभी हाइट वजह बन जाती. ऐसे समय में उन्हें लगने लगा था कि शायद यह इंडस्ट्री सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए है जिनका पहले से कोई बैकग्राउंड हो.
हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी. उनका मानना है कि एक दिन का रिजेक्शन आपकी पूरी जिंदगी तय नहीं करता. अगर आप लगातार मेहनत करते रहें तो एक मौका जरूर मिलता है और वही मौका आपकी जिंदगी बदल सकता है.
धर्मा प्रोडक्शन की 'Yodha' ने बदल दिया नजरिया
अंकित राज ने सिद्धार्थ मल्होत्रा स्टारर Yodha में भी काम किया. हालांकि फिल्म में उनके कई सीन एडिट हो गए, लेकिन इसका उन्हें कोई अफसोस नहीं है. वे बताते हैं कि कहानी की गति और सस्पेंस बनाए रखने के लिए ऐसा फैसला लिया गया था और एक अभिनेता के तौर पर वे इस बात को समझते हैं. हालांकि इस फिल्म ने उन्हें एक बड़ी सीख जरूर दी. उनके मुताबिक धर्मा प्रोडक्शन के सेट पर हर कलाकार के साथ बेहद सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है. कलाकार को सिर्फ अपने अभिनय पर ध्यान देना होता है क्योंकि बाकी हर सुविधा पहले से उपलब्ध रहती है.
अंकित का कहना है कि जब कलाकार के दिमाग से बाकी सारी चिंताएं हट जाती हैं, तभी उसका सर्वश्रेष्ठ अभिनय बाहर आता है. यही वजह है कि बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्मों की गुणवत्ता अलग दिखाई देती है.
क्यों है 'Raktanchal 3' उनके करियर का सबसे खास प्रोजेक्ट?
अंकित राज बिना किसी झिझक के कहते हैं कि Raktanchal 3 उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे खास प्रोजेक्ट है. इसकी सबसे बड़ी वजह हैं निर्देशक रीतम श्रीवास्तव. वे बताते हैं कि जब वे मुंबई आए थे, तभी उन्होंने Raktanchal का पहला सीजन देखा था और तभी से उसके बड़े प्रशंसक बन गए थे. बाद में जब उन्हें खुद इसी सीरीज का हिस्सा बनने का मौका मिला और वह भी निर्देशक के पर्सनल कॉल के जरिए, तो यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था.
अंकित का मानना है कि निर्देशक रीतम श्रीवास्तव कलाकार से बिल्कुल वही अभिनय निकलवाना जानते हैं जिसकी कहानी को जरूरत होती है. वे बताते हैं कि निर्देशक सिर्फ सीन नहीं समझाते, बल्कि किरदार की पूरी मानसिक यात्रा अभिनेता के सामने रख देते हैं. Raktanchal 3 में उनके किरदार 'गगन श्रीवास्तव' का सफर भी ऐसा ही है. शुरुआत में वह एक साधारण और विनम्र इंसान दिखाई देता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ उसका आत्मविश्वास, प्रभाव और व्यक्तित्व पूरी तरह बदल जाता है. अंकित के मुताबिक इस बदलाव को पर्दे पर सही तरीके से दिखाने में निर्देशक की सबसे बड़ी भूमिका रही.
नए कलाकारों के लिए अंकित राज का संदेश
इंटरव्यू के आखिर में अंकित राज ने नए कलाकारों को सलाह दी कि अभिनय सिर्फ सपनों का नहीं बल्कि धैर्य का भी पेशा है. उन्होंने कहा कि मुंबई आने से पहले आर्थिक तैयारी जरूर करें. रिजेक्शन को व्यक्तिगत हार न समझें और खुद पर लगातार काम करते रहें. क्योंकि इंडस्ट्री में पहला मौका मिलना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं. उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो नाले के किनारे रहने वाला लड़का भी एक दिन बड़े बैनर, फिल्मों और चर्चित वेब सीरीज तक पहुंच सकता है.