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मेघालय पुलिस की इस गलती की वजह से राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम को मिल गई जमानत, लेकिन कोर्ट ने रखी ये शर्तें

राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय पुलिस की दस्तावेजी गलती के कारण जमानत मिल गई. चलिए जानते हैं सोनम रघुवंशी को किन शर्तों पर जमानत मिली हैं.

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Km Jaya

सोनम रघुवंशी जिन पर अपने हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप लगा, उन्हें कोर्ट ने जमानत दे दी है. इस मामले के दस्तावेजों में मेघालय पुलिस द्वारा की गई एक लिपिकीय त्रुटि ही सोनम को जमानत मिलने का आधार बनी. अपने आदेश में कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी गलती सभी दस्तावेजों में एक साथ नहीं हो सकती थी. 

कोर्ट ने सोनम की रिमांड और हिरासत को भी अवैध घोषित कर दिया. हालांकि कोर्ट ने सोनम को कुछ शर्तों के अधीन जमानत दी है.सोनम रघुवंशी को जमानत देते समय कोर्ट ने अपने आदेश में चार शर्तें रखीं. 

क्या हैं वे शर्त?

  • कोर्ट द्वारा तय की गई पहली शर्त यह है कि सोनम न तो फरार होंगी और न ही वह सबूतों या गवाहों के साथ छेड़छाड़ करेंगी.
  • दूसरी शर्त यह है कि सोनम को हर निर्धारित तारीख पर कोर्ट के सामने पेश होना होगा.
  • तीसरी शर्त यह है कि सोनम बिना उचित अनुमति के इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगी.
  • अंतिम शर्त यह है कि सोनम को ₹50,000 का एक निजी मुचलका जो कोर्ट की संतुष्टि के अनुरूप हो और साथ ही उतनी ही राशि के दो जमानती पेश करने होंगे.

कैसे मिली जमानत?

शिलांग की अतिरिक्त उपायुक्त डसालेना आर. खारबुली ने मंगलवार को सोनम रघुवंशी की चौथी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत दे दी. इससे पहले उन्होंने जमानत पाने के तीन असफल प्रयास किए थे. सूत्रों के अनुसार कोर्ट ने पाया कि पुलिस सोनम को उनकी गिरफ्तारी के विशिष्ट कारणों के बारे में ठीक से सूचित करने में विफल रही थी. 

इस चूक ने उन्हें राहत पाने का एक कानूनी रास्ता प्रदान किया और इसी आधार पर सोनम को जमानत दी गई. दोनों पक्षों की सभी दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता से जुड़े सभी दस्तावेजों में गिरफ्तारी के कारणों और केस डायरी के अंशों सहित पुलिस ने गलती से BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया था.

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

कोर्ट ने गौर किया कि किसी भी दस्तावेज में याचिकाकर्ता को यह नहीं बताया गया था कि असल में उसे BNS की धारा 103(1) के तहत एक कहीं ज्यादा गंभीर अपराध के लिए गिरफ्तार किया जा रहा है. कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि यह महज एक क्लर्क की गलती थी. मेघालय पुलिस को फटकार लगाते हुए, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'इस तरह की गलती सभी दस्तावेजों में नहीं हो सकती. इसलिए आरोपी की प्रारंभिक गिरफ्तारी संवैधानिक आदेशों का उल्लंघन है और अपने आप में ही अवैध है, जिसके से रिमांड और हिरासत भी गैर-कानूनी हो जाता है. इस वजह से वह जमानत पर रिहा होने की हकदार है.'