17 एग्जाम में फेल होने के बाद भी नहीं टूटा हौसला...आखिरकार विवेक यादव बन गए IPS अधिकारी; जानें ड्राइवर के बेटे का सक्सेस स्टोरी
विवेक यादव ने 17 बार असफल होने के बावजूद हार नहीं मानी और UPSC 2025 में 487वीं रैंक हासिल कर IPS बनने का सपना पूरा किया. उनकी सफलता मेहनत, धैर्य और माता-पिता के समर्थन की मिसाल है.
चंदेरी: मध्य प्रदेश के छोटे से शहर चंदेरी से निकले विवेक यादव ने वह कर दिखाया है, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है. 17 प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार UPSC 2025 में 487वीं रैंक हासिल कर ली. उनकी यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि लगातार मेहनत और धैर्य से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
विवेक यादव का सफर आसान नहीं रहा. उनके पिता नवल सिंह यादव चंदेरी नगर पालिका में ड्राइवर के रूप में काम करते हैं, जबकि उनकी मां आंगनवाड़ी सहायिका हैं और घर चलाने के लिए सिलाई का काम भी करती हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने हमेशा उनके सपनों को प्राथमिकता दी और पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी.
किन-किन परीक्षाओं में हुए फेल?
विवेक ने अपनी सफलता से पहले 17 अलग-अलग परीक्षाओं में असफलता का सामना किया. इनमें नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, NDA, UPSC सिविल सेवा परीक्षा के तीन प्रयास, MPPSC, UPPSC इंटरव्यू, CAPF, पटवारी, KVS क्लर्क, SSC दिल्ली पुलिस कांस्टेबल और UGC NET JRF जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. जहां अधिकतर लोग दो-तीन बार असफल होने के बाद हार मान लेते हैं, वहीं विवेक ने हर असफलता से सीख लेकर खुद को और मजबूत बनाया.
क्या था इनका सपना?
उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने UPSC परीक्षा दो बार पास की. इससे पहले वह रेलवे में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयनित हो चुके थे और लखनऊ में ट्रेनिंग ले रहे थे लेकिन उनका सपना खाकी वर्दी पहनकर देश सेवा करने का था. इसी लक्ष्य के लिए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और पांचवें प्रयास में UPSC 2025 में सफलता हासिल कर IPS बनने का सपना पूरा किया.
कहां से ली प्रारंभिक शिक्षा?
विवेक यादव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चंदेरी के सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इतिहास ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया और फिर इग्नू से पोस्टग्रेजुएशन किया. पिछले तीन सालों से वह पूरी तरह सिविल सेवा की तैयारी में जुटे हुए थे.
उनकी यह यात्रा यह साबित करती है कि छोटे शहर से आने वाला एक छात्र भी बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा कर सकता है. विवेक यादव की सफलता उन सभी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो बार-बार असफल होने के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं.