आंकड़े सही या गलत, भारत में GDP ग्रोथ रेट पर मचे बवाल के बीच WORLD BANK ने क्या कहा?

भारत की 7.8% GDP वृद्धि पर उठे सवालों के बीच वर्ल्ड बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने आंकड़ों का बचाव किया है. उन्होंने वाहन बिक्री, कर्ज, टैक्स और निवेश को अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया.

Social Media
Kuldeep Sharma

भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.8% दर्ज हुई, लेकिन पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने नई गणना पद्धति पर सवाल उठाए. कांग्रेस ने भी सरकार पर आंकड़ों के जरिए आर्थिक तस्वीर चमकाने का आरोप लगाया है.

GDP के आंकड़ों पर क्यों मचा है विवाद?

विवाद की जड़ फरवरी 2026 में जारी GDP की नई सीरीज है. इसमें आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया और आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए. सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि नई सीरीज में पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में बड़े संशोधन हुए हैं. उन्होंने जून 2025 के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का दावा किया. उनके अनुसार पुराने आंकड़ों से तुलना करने पर जून 2026 की वृद्धि दर करीब 2.6% रह सकती थी.

नीलकंठ मिश्रा ने दावों पर उठाए सवाल

वर्ल्ड बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने सोशल मीडिया पर GDP को लेकर हो रही आलोचना का जवाब दिया. उन्होंने बिना नाम लिए ऐसे दावों को गलत और अधूरी समझ पर आधारित बताया. मिश्रा के मुताबिक नई GDP सीरीज में अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों को मापने के लिए बेहतर तरीके अपनाए गए हैं. उनका तर्क है कि नई और पुरानी सीरीज की सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि गलत जानकारी कई बार तेजी से फैलती है, इसलिए आंकड़ों को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है.


वाहन बिक्री से टैक्स कलेक्शन तक, ये आंकड़े दिए

मिश्रा ने GDP के अलावा कई दूसरे आर्थिक संकेतकों का हवाला दिया. उनके अनुसार अगस्त में कार और SUV की बिक्री करीब 35% बढ़ी, जबकि दोपहिया वाहनों की बिक्री में 20% से अधिक की वृद्धि हुई. निर्यात लगभग 9% बढ़ा और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में करीब 40% की तेजी आई. उन्होंने बैंक कर्ज, टैक्स संग्रह और निर्माण गतिविधियों में सुधार को भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया. उनके मुताबिक निजी निवेश कमजोर होने की बात अब पहले जैसी स्थिति में नहीं कही जा सकती.

7.5% तक रह सकती है ग्रोथ, लेकिन कमाई चुनौती

नीलकंठ मिश्रा का अनुमान है कि आने वाले समय में भारत की औसत आर्थिक वृद्धि 7% से ऊपर रह सकती है. उनके मुताबिक सामान्य बजट और मौद्रिक नीतियों की स्थिति में भी GDP करीब 7.5% की रफ्तार हासिल कर सकती है. हालांकि उन्होंने माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ सुस्ती मौजूद है. वास्तविक वेतन की धीमी बढ़ोतरी इसका संकेत है. इसे दूर करने और रोजगार बाजार को मजबूत बनाने के लिए भारत को लगातार कई तिमाहियों तक तेज आर्थिक वृद्धि बनाए रखनी होगी. साथ ही भविष्य में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है.