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लाखों की नौकरी छोड़ बेचने लगा फालूदा, आज हैं 18 से ज्यादा आउटलेट्स, प्रदीप कन्नन की सक्सेस स्टोरी

मामला साल 2019 का है जब प्रदीप कन्नन ने एक मल्टीनेशनल कंपनी ओरेकल में ऑपरेशंस हेड के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने पैतृतगांव करूर लौट आए. यहां उन्होंने 'द फालूदा शॉप' नाम से एक दुकान खोली.

@Pradeepkannanj
Sagar Bhardwaj

दुनिया में लाखों करोड़ों लोग ऐसे हैं जो केवल अपने सपने को पूरा करने के लिए केवल सपना ही देखते रहते हैं लेकिन जो बहादुर होते हैं वो तमाम मुसीबतों को दरकिनार करते हुए कुछ कर गुजरते हैं और इतिहास ऐसे ही लोगों को याद रखता है.

यह कहानी भी ऐसे ही एक शख्स की है जिसने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी सुरक्षित कॉरपोरेट नौकरी को छोड़ दिया और एक बड़ा जोखिम लेकर अपना मनपसंद बिजनेस शुरू किया.

मामला साल 2019 का है जब प्रदीप कन्नन ने एक मल्टीनेशनल कंपनी ओरेकल में ऑपरेशंस हेड के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने पैतृतगांव करूर लौट आए. यहां उन्होंने 'द फालूदा शॉप' नाम से एक दुकान खोली.

कहते हैं ना कि कुछ अलग हटकर करने वाले को लोग बेवकूफ कहते हैं. प्रदीप को भी लोगों ने बेवकूफ कहा और उनके फैसले को मूर्खता भरा बताया लेकिन प्रदीप अपने फैसले पर अडिग रहे. इन सात सालों में प्रदीप ने सफलता की ऐसी इबारत लिखी कि आज वह उनकी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं जो कभी प्रदीप की आलोचना किया करते थे. आज प्रदीप के 18 से ज्यादा आउटलेट्स हैं.

22 लाख रुपए से शुरू किया था बिजनेस

प्रदीप ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बताया कि उन्होंने बेंगलुरु में अपना पहला आउटलेट कितने रुपए में खोला था. उन्होंने बताया कि फालूदा की पहली दुकान शुरू करने के लिए उन्होंने 22 लाख रुपए का निवेश किया था.

उन्होंने बताया कि 2.4 लाख किराए की राशि जमा की थी, 60 हजार रुपए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन का खर्च था. वहीं सामान खरीदने के लिए उन्हें 2 लाख रुपए खर्च करने पड़े, वहीं 10 लाख रुपए फर्नीचर और इंटीरियर पर खर्च हुआ. इसके अलावा 3.2 लाख रुपए कच्चा माल और पैकेजिंग पर और पहले महीने के लिए 80 हजार रुपए चार कर्मचारियों की सैलरी पर खर्च हो गए. वहीं ब्रांडिंग और लॉन्चिंग पर 1 लाख रुपए का खर्च आया. हालांकि उन्होंने 3 लाख रुपए कैश में रखने की योजना बनाई थी लेकिन वह 2 लाख ही बचा सके.

कन्नन ने अपनी सफलता की कहानी बताते हुए लोगों को एक सीख भी दी कि आपको फैंसी इंटीरियर की नहीं बल्कि बार-बार ग्राहकों की जरूरत है.

सोशल मीडिया पर लोग कन्नन की सफलता की कहानी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. एक व्यक्ति ने उनके पोस्ट पर कमेंट कर लिखा, 'खाने के बिजनेस में सबसे अच्छी सजावट दरवाजे के बागर लगी लंबी कतार होती है. आपके दरवाजे पर हमेशा लंबी कतार लगी रहे. शुभकामनाएं.'