कार्रवाई न होने से परेशान होकर कर्नाटक के किसानों ने उठाया कदम, चंदा जुटाकर खुद मरम्मत कराई 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क

कर्नाटक के बल्लारी जिले में 150 किसानों ने सरकारी मदद नहीं मिलने पर 3 लाख रुपये जुटाकर 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत कराई. चलिए जानते हैं किसानों ने अब प्रशासन से क्या मांग रखी है.

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Km Jaya

बल्लारी: कर्नाटक के बल्लारी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां सरकारी मदद नहीं मिलने से परेशान किसानों ने खुद ही चंदा जुटाकर अपनी सड़क की मरम्मत कर डाली. करीब 150 किसानों ने मिलकर 3 लाख रुपये इकट्ठा किए और 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को फिर से उपयोग योग्य बनाया.

यह सड़क लगभग 500 एकड़ सिंचित कृषि भूमि तक पहुंचने का मुख्य मार्ग है. किसान लंबे समय से इसकी खराब स्थिति से परेशान थे. भारी बारिश के बाद सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे, जिससे खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था. किसानों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण कई दुर्घटनाएं भी हुईं और कई लोग घायल हुए.


किसानों ने क्या रखी थी मांग?

किसानों के अनुसार उन्होंने कई बार संबंधित सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क की मरम्मत कराने की मांग की थी. हालांकि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. लगातार इंतजार और परेशानी के बाद किसानों ने स्वयं ही समाधान निकालने का फैसला किया.

मरम्मत कार्य के लिए किसानों ने प्रति एकड़ 2,000 रुपये का योगदान दिया. इसके बाद ट्रैक्टर, जेसीबी मशीन और बजरी की मदद से पूरी सड़क की मरम्मत की गई. किसानों ने सड़क को समतल कर सुरक्षित बनाया ताकि खेतों तक आवागमन आसान हो सके और दुर्घटनाओं का खतरा कम हो.

किसान लोकेश ने क्या बताया?

किसान लोकेश ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब ग्रामीणों को खुद सड़क की मरम्मत करनी पड़ी हो. उन्होंने कहा कि लगभग तीन साल पहले भी किसानों ने आपस में पैसा जुटाकर सड़क की मरम्मत कराई थी. लेकिन पिछले वर्ष हुई भारी बारिश ने सड़क को फिर से क्षतिग्रस्त कर दिया और कई हिस्सों में बड़े गड्ढे बन गए.

लोकेश के अनुसार पास की नहर का पानी हर साल सड़क पर आ जाता है, जिससे सड़क बार-बार टूट जाती है. उन्होंने कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक किसानों को हर कुछ वर्षों में इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी.

किसानों ने अब प्रशासन से स्थायी सीमेंट-कंक्रीट सड़क बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि पक्की सड़क बनाई जाती है तो हर दो-तीन साल में मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी और किसानों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी.