कर्नाटक सरकार ने HAL के स्थानांतरण की खबरों को किया खारिज, आंध्र प्रदेश की पेशकश पर उठे सवाल!

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार एचएएल को बेंगलुरु से बाहर स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं देगी. उन्होंने आगे कहा कि HAL सिर्फ एक उद्यम नहीं है - यह एक राष्ट्रीय संपत्ति है, आत्मनिर्भरता का प्रतीक है और पंडित नेहरू और कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ की गौरवशाली विरासत है.

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Mayank Tiwari

कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की उत्पादन इकाइयों को आंध्र प्रदेश में स्थानांतरित करने की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है. यह बयान तब आया जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कथित तौर पर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए HAL की इकाइयों को अपने राज्य में लाने का प्रस्ताव रखा.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने आंध्र प्रदेश को एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों का केंद्र बनाने की योजना पेश की.

आंध्र प्रदेश का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव

हाल ही में सीएम नायडू ने राजनाथ सिंह को बताया कि आंध्र प्रदेश के जग्गय्यापेट और डोनाकोंडा के बीच 6,000 एकड़ जमीन पर एक रक्षा क्लस्टर विकसित करने की योजना है, जहां मिसाइल और गोला-बारूद उत्पादन इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं. इसके अलावा, उन्होंने लेपाक्षी-मडकसिरा क्षेत्र में 10,000 एकड़ जमीन पर सैन्य और नागरिक विमान निर्माण के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की सुविधाएं स्थापित करने का प्रस्ताव रखा. नायडू ने कहा, "रक्षा मंत्री ने एक पूर्ण एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के विचार पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी.

नायडू ने यह भी अनुरोध किया कि विशाखापट्टनम-अनाकापल्ली क्षेत्र में नौसेना उपकरण उत्पादन और हथियार परीक्षण सुविधाएं स्थापित की जाएं. उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026 तक HAL को ₹2.5 लाख करोड़ के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, और आंध्र प्रदेश लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) के उत्पादन विस्तार के लिए जमीन और बुनियादी ढांचा प्रदान करने को तैयार है. इसके अतिरिक्त, कुरनूल जिले के ओरवाकल में 4,000 एकड़ जमीन पर सैन्य ड्रोन, रोबोटिक्स और उन्नत रक्षा उपकरणों की इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया गया.

कर्नाटक सरकार का कड़ा रुख

कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने नायडू के प्रस्ताव को "अनुचित और चिंताजनक" करार दिया. पाटिल ने कहा, "नायडू अपने राज्य में HAL की नई इकाई स्थापित करने की मांग कर सकते हैं, लेकिन यदि उन्होंने कर्नाटक की मौजूदा इकाइयों को स्थानांतरित करने की बात की है, तो यह अनुचित है." उन्होंने जोर देकर कहा कि आंध्र प्रदेश भविष्य के विस्तार में HAL की मौजूदगी की मांग कर सकता है, लेकिन कर्नाटक के मौजूदा ढांचे की कीमत पर नहीं. पाटिल ने मंगलवार को फिर दोहराया, "मेरी जानकारी के अनुसार, कोई भी मुख्यमंत्री HAL को कहीं और स्थानांतरित करने की मांग नहीं कर सकता. उन्होंने शायद भविष्य के विस्तार या नई इकाई की बात की होगी. 

इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी स्थानांतरण की संभावना को खारिज करते हुए कहा, "मेरी जानकारी के अनुसार, ऐसा नहीं हो सकता. HAL को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा."

आंध्र प्रदेश का स्पष्टीकरण

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी सुविधा के स्थानांतरण की मांग नहीं की. नायडू ने केवल लेपाक्षी-मडकसिरा क्षेत्र में 10,000 एकड़ जमीन HAL के विस्तार योजनाओं के लिए पेश की थी. एक शीर्ष सूत्र ने बताया, "ऐसी रक्षा यूनिटों को सेटबैक की आवश्यकता होती है, जो आंध्र प्रदेश में संभव है और कर्नाटक में शायद मुश्किल हो."

राज्य सरकार HAL को बेंगलुरु से बाहर स्थानांतरित नहीं होने देगी

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार HAL को बेंगलुरु से बाहर स्थानांतरित नहीं होने देगी. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं आंध्र की मांगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. मैं चाहता हूं कि संसद सदस्य और केंद्रीय मंत्री इस पर प्रतिक्रिया दें, लेकिन सरकार के रूप में हम किसी भी चीज को स्थानांतरित नहीं होने देंगे. अगर वे विस्तार चाहते हैं, तो हम जमीन देंगे." शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि HAL कर्नाटक का गौरव है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राज्य को दिया था.

रक्षा मंत्रालय ने मामले पर साधी चुप्पी

उसी दिन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के लिए कार्यान्वयन मॉडल को मंजूरी दी, जो HAL के भविष्य और भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है. इस मंजूरी का समय कर्नाटक के लिए चिंता का विषय बना, क्योंकि AMCA परियोजना भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण के लक्ष्य का आधार है. रक्षा मंत्रालय ने अभी तक इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.