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कर्नाटक में सत्ता का नया समीकरण, सिद्धारमैया खेमे के 9 नेताओं को मिल सकते हैं मंत्री पद: सूत्र

कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार का मंत्रिमंडल दो चरणों में विस्तार पा सकता है. पहले चरण में 3 जून को नौ नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार इनमें सिद्धारमैया के कई करीबी नेता शामिल हो सकते हैं.

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Km Jaya

बेंगलुरु: सोमवार को सूत्रों ने बताया कि कर्नाटक में कैबिनेट का विस्तार संभवतः दो चरणों में होगा और सिद्धारमैया के नौ वफादारों को मंत्री पद दिए जा सकते हैं. यह बात डीके शिवकुमार के दक्षिणी राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने से कुछ दिन पहले सामने आई है.

शिवकुमार 3 जून को बेंगलुरु के लोक भवन में एक सादे समारोह में शपथ लेंगे. उनके साथ कम से कम नौ कांग्रेस नेता भी शपथ ले सकते हैं. सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट का दूसरा विस्तार 18 जून को होगा. कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं.

सिद्धारमैया ने कितने नेताओं और विधायकों की दी है सूचना?

सिद्धारमैया ने नौ नेताओं और विधायकों की एक सूची दी है, जिन्हें उनके विचार से कैबिनेट में जगह मिलनी चाहिए. सिद्धारमैया, शिवकुमार के साथ, कैबिनेट के संबंध में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करने के लिए सोमवार को दिल्ली भी आ रहे हैं.


सिद्धारमैया की सरकार में मंत्री रह चुके नेता अगली कैबिनेट में भी जगह पक्की करना चाहते हैं. इसके अलावा कई ऐसे नेता भी हैं जो कर्नाटक विधानसभा के लिए तीन बार चुने जा चुके हैं और वे भी मंत्री पद चाहते हैं. उन्होंने बताया कि कांग्रेस के 136 विधायकों में से 90 विधायक मंत्री बनने की दौड़ में हैं. इनमें से कई नेताओं ने शिवकुमार और सिद्धारमैया, दोनों से मुलाकात की है.

क्या लगाई जा रहीं अटकलें?

ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि राज्य में कई उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं. हालांकि सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अगली सरकार को लेकर काफी सतर्क है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पार्टी कैबिनेट में पुराने और नए चेहरों का एक संतुलित मिश्रण चाहती है.

इन तमाम अटकलों के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि पार्टी नेतृत्व को नई कर्नाटक कैबिनेट के गठन के संबंध में अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. हमें देखना होगा. अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है. एक बार प्रस्ताव आ जाने के बाद इस पर चर्चा होगी कि कितने मंत्री और उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने चाहिए और क्या इसके साथ ही महत्वपूर्ण अध्यक्ष पद भी भरे जाने चाहिए.'