बेंगलुरु: कर्नाटक के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री एस वी रामचंद्र गौड़ा का मंगलवार सुबह 88 वर्ष की आयु में बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और उनका उपचार चल रहा था. सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से भाजपा और कर्नाटक की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई.
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु के कामाक्षीपाल्या स्थित उनके निजी परिसर में किया जाएगा. अंतिम दर्शन के लिए परिवार के सदस्यों, भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों के पहुंचने की उम्मीद है.
Ramachandra Gowda, a senior BJP Leader and former state minister, has passed away at the age of 88 in a private hospital in Bengaluru.
— ANI (@ANI) July 14, 2026
(Pic: Former Karnataka CM BS Yediyurappa's X handle) pic.twitter.com/UnviTywy9Z
पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि रामचंद्र गौड़ा केवल राजनीतिक सहयोगी ही नहीं बल्कि कई दशकों से उनके करीबी साथी थे. उन्होंने कहा कि जनसंघ के दौर से दोनों ने मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम किया. येदियुरप्पा ने कहा कि रामचंद्र गौड़ा के निधन से पार्टी, सार्वजनिक जीवन और उनके व्यक्तिगत जीवन में एक बड़ी कमी आ गई है.
एस वी रामचंद्र गौड़ा कर्नाटक भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे. उनका राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा. उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली. मंत्री रहते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, रेशम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, लघु बचत तथा खान एवं भूविज्ञान जैसे अहम विभागों का नेतृत्व किया.
उन्होंने एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली भाजपा और जनता दल सेक्युलर गठबंधन सरकार में भी मंत्री के रूप में कार्य किया. बाद में बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मंत्री का दायित्व संभाला. उनके कार्यकाल के दौरान कर्नाटक में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला भी लागू किया गया था.
रामचंद्र गौड़ा बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित होकर उन्होंने छात्र जीवन में ही सार्वजनिक जीवन में कदम रखा. उन्होंने गोवा मुक्ति आंदोलन में भी भाग लिया और बाद में भारतीय जनसंघ के सक्रिय सदस्य बने. वर्ष 1970 में वह जनसंघ के प्रतिनिधि के रूप में बेंगलुरु नगर निगम पहुंचे और उसी वर्ष सिटी इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य भी चुने गए. बाद में उन्होंने भाजपा के प्रदेश महासचिव के रूप में भी लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.