JPSC-JSSC Protest: गेस्ट हाउस पहुंचा मंत्री और छात्रों का प्रतिनिधिमंडल, कुछ ही देर में शुरू होगी अहम बातचीत
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंत्रियों का पैनल और छात्रों का प्रतिनिधिमंडल रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में आमने-सामने बैठा.
रांची में लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अब समाधान की दिशा में पहल शुरू हुई है. राज्य सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाकर छात्रों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. स्टेट गेस्ट हाउस में होने वाली इस अहम बैठक से आंदोलन के भविष्य और छात्रों की मांगों पर महत्वपूर्ण फैसला निकलने की उम्मीद है.
सरकार और छात्रों के बीच शुरू हुई संवाद की पहल
झारखंड सरकार ने JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय मंत्री समूह रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गया, जहां आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा. दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होने से पहले बैठक की रूपरेखा तय की गई. माना जा रहा है कि सरकार छात्रों की शिकायतों और सुझावों को विस्तार से सुनने के बाद आगे की रणनीति पर निर्णय ले सकती है.
चार मंत्रियों की समिति संभाल रही जिम्मेदारी
छात्रों से संवाद के लिए गठित समिति में झामुमो के चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू, कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह तथा राजद के संजय प्रसाद यादव शामिल हैं. सरकार का उद्देश्य आंदोलन को टकराव की बजाय बातचीत के माध्यम से आगे बढ़ाना है. समिति छात्रों की मांगों को समझने के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करेगी. इस बैठक को राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है.
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10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रखेगा छात्रों का पक्ष
आंदोलन कर रहे मुख्य छात्र समूह ने वार्ता के लिए 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है. इस दल में रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल हैं. यह प्रतिनिधिमंडल देवेंद्र महतो के गुट से अलग छात्र समूह का प्रतिनिधित्व कर रहा है और सरकार के सामने आंदोलन से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दे तथा मांगें विस्तार से रखने वाला है.
वार्ता के नतीजों पर टिकी सबकी निगाहें
राज्यभर में हजारों छात्र लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं. ऐसे में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. यदि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनती है तो आंदोलन शांत होने की संभावना बढ़ सकती है. वहीं यदि बातचीत किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंचती, तो छात्र आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं. फिलहाल सभी की नजरें इस वार्ता के परिणाम पर टिकी हुई हैं.