झारखंड में 21 नक्सली ढेर, अगला निशाना कौन? टॉप माओवादी नेताओं पर सुरक्षा बलों की नजर
झारखंड के सारंडा और कोल्हान के घने जंगल एक बार फिर सुर्खियों में हैं. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अब 17 कुख्यात माओवादियों के मारे जाने के बाद अब सुरक्षाबलों की निगाहें पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा पर टिकी हैं.
रांची: झारखंड के सारंडा और कोल्हान के घने जंगल एक बार फिर सुर्खियों में हैं. माओवादी के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन मेधाहातू ने संगठन की कमर तोड़ दी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां यहीं रुकने के मूड में नहीं हैं. 17 कुख्यात नक्सलियों के मारे जाने के बाद अब सुरक्षाबलों की निगाहें पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा पर टिकी हैं. जंगलों में लगातार दबाव और सीमावर्ती राज्यों की सख्ती ने माओवादी गतिविधियों की राह मुश्किल कर दी है.
हालिया मुठभेड़ों में पतिराम मांझी उर्फ अनल, अनमोल, अमित मुंडा जैसे बड़े नाम ढेर हुए हैं. इन कार्रवाइयों के बाद यह साफ हो गया है कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने की रणनीति पर सुरक्षा बल काम कर रहे हैं. खुफिया जानकारी के मुताबिक, मिसिर बेसरा का दस्ता जराइकेला इलाके में कैंप कर रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए हैं.
मिसिर बेसरा का दस्ता और आईईडी का जाल
सूत्रों के अनुसार, मिसिर बेसरा के साथ दो तेलगू माओवादी—टेक विश्वनाथ उर्फ पुसुनूहरि नाराहरि और उसकी पत्नी नीलिमा—प्रोटेक्शन दस्ते में सक्रिय हैं. टेक विश्वनाथ को माओवादी संगठन का सबसे बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है.
बताया जा रहा है कि जिस इलाके में दस्ता ठहरा है, वहां चारों ओर आईईडी बिछाए गए हैं. इसी वजह से पहले के अभियानों में सुरक्षाबलों को नुकसान उठाना पड़ा और कई बार ग्रामीण भी इसकी चपेट में आए.
सीमावर्ती इलाकों में ओडिशा पुलिस की सख्ती
पहले मुठभेड़ के बाद माओवादी अक्सर झारखंड से ओडिशा की सीमा में दाखिल हो जाते थे, लेकिन इस बार ओडिशा पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है. सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सर्च ऑपरेशन चल रहे हैं, जिससे सारंडा में घिरे नक्सलियों के लिए जंगल छोड़कर भागना कठिन हो गया है.
कैंप नेटवर्क से घेराबंदी और सफाया
सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में 2011 से ही सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन एनाकोडा के तहत कैंप स्थापित किए थे. वर्ष 2024 से पहले इन इलाकों और ओडिशा सीमा में कुल 65 कैंप थे. पिछले दो वर्षों में 25 नए कैंप और जोड़े गए, जिससे माओवादी नेटवर्क पर स्थायी दबाव बना और उनकी आवाजाही सीमित हुई.
संगठन के भीतर नेतृत्व संकट
जानकारी के मुताबिक, 65 लाख के इनामी अनमोल उर्फ सुशांत को सैक सदस्य से प्रमोट कर केंद्रीय कमेटी सदस्य बनाए जाने की तैयारी थी, लेकिन उसकी मौत से यह योजना धरी रह गई. हाल के महीनों में ओडिशा, आंध्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में केंद्रीय कमेटी के कई सदस्य मारे गए हैं. ऐसे में संगठन सैक सदस्यों को शीर्ष नेतृत्व में लाने की कोशिश कर रहा था. मिसिर बेसरा के साथ मौजूद टेक विश्वनाथ को भी सीसी मेंबर बनाने की चर्चा थी.
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