रांची: झारखंड के चाईबासा, हजारीबाग और कई दूसरे जिलों के गांववालों को अब जंगली हाथियों के उत्पात से राहत मिलने वाली है. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इन 'बेकाबू' हाथियों को कंट्रोल करने के लिए एक ऐसी स्ट्रेटेजी बनाई है जो पहले कभी नहीं देखी गई. अब जंगली हाथियों से निपटने के लिए कर्नाटक से 'हाथियों के बॉस' कहे जाने वाले 'कुमकी' हाथियों की एक खास टीम लाई जा रही है.
कुमकी हाथी खास तौर पर ट्रेंड एशियाई हाथी होते हैं. ये हाथी इतने निडर और डिसिप्लिन्ड होते हैं कि घने जंगलों में हिंसक हाथियों के सामने भी शांत रहते हैं. जंगली हाथी इनसे डरते हैं और इन पर हमला नहीं कर पाते. कुमकी हाथियों की पीठ पर सवार होकर, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम जंगली हाथियों के पास जाती है और उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन देकर कंट्रोल करती है.
झारखंड के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स यानी PCCF रवि रंजन ने कहा कि जानलेवा हमलों को रोकने के लिए राज्य के अलग-अलग जिलों में छह कुमकी हाथियों को तैनात किया जाएगा. ये हाथी न सिर्फ जंगली हाथियों को पकड़ेंगे बल्कि उन्हें रिहायशी इलाकों से वापस जंगल की गहराई में भगाने में भी माहिर हैं.
हाथियों ने हाल के दिनों में चाईबासा और हजारीबाग में कई इंसानों की जान ले ली है. अब इन ट्रेंड हाथियों को अलग-अलग जोन में रखा जाएगा ताकि जानकारी मिलते ही 'हाथियों का बॉस' मौके पर पहुंचकर स्थिति को कंट्रोल कर सके.
रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के जंगलों में हाथियों के हिंसक होने के मुख्य कारण है, घटते जंगल के इलाके की वजह से हाथियों को काफी खाना यानी 17 घंटे की डाइट नहीं मिल पा रहा है. अपनी भूख मिटाने के लिए हाथी खेतों और बस्तियों की तरफ जा रहे हैं, जहां उन्हें केले और पकी फसलें आसानी से मिल जाती हैं. खाने और इलाके को लेकर बढ़ते झगड़े की वजह से कमजोर नर हाथियों को झुंड से बाहर निकाल दिया जा रहा है, जिससे अकेले छोड़े जाने पर वे और ज्यादा हिंसक हो जाते हैं.